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कोलवास के विस्थापितों पर फिर मुसीबत

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बरहज (देवरिया)। कोलखास के विस्थापितों पर फिर कुदरत ने कहर बरपाया है। पांच साल पहले इस गांव को घाघरा लील चुकी है। ये पटना गांव में जिंदगी काट रहे थे, लेकिन फिर घाघरा ने इन्हें उजाड़ दिया। अब ये राजजानकी मार्ग पर प्लास्टिक के टेंट में शरण लिए हुए हैं। विस्थापितों का कहना है कि लगता है, घाघरा उन्हें चैन से रहने नहीं देगी। पांच साल पहले नदी ने सब कुछ छीन लिया, अब फिर डुबो दिया।
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कपरवार संगम तट से कुछ दूरी और गोरखपुर जनपद के गांव कोलखास में करीब 100 घर थे। 2011-12 में घाघरा ने इस गांव को अपने में विलीन कर लिया। सड़क के किनारे टेंट में रह रहीं बिंदू देवी, दुखी मल्लाह, रितेश साहनी, फूलमती, सुमन, सुमित्रा देवी का कहना है कि 2011-12 में घाघरा गांव पर कहर बरपाने लगी। प्रशासन की उपेक्षाओं और लापरवाही से गांव पूरी तरह तबाह हो गया है। विस्थापितों ने बताया कि सरकार से मदद न मिलने पर करीब तीन साल तक सड़क के किनारे रहना मजबूरी हो गया था। दो साल पहले सरकार ने पटना गांव के पुन्नन सिंह से जमीन खरीद दो-दो डिस्मिल भूमि उपलब्ध कराया, लेकिन आज तक छत नसीब नहीं हो पाया है। घाघरा के जलस्तर में इजाफा से विस्थापितों की जलमग्न हो गया है। अब ये लोग फिर सड़क के किनारे जिंदगी जीने को मजबूर है।
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