एकौना/ रुद्रपुर। नरायनपुर गांव का रकबा साल दर साल घटता जा रहा है। नदी और बंधे के बीच बसे गांव को हर साल गोर्रा नदी छोटी करती जा रही है। दस साल से कट रहे गांव को बचाने के लिए प्रशासन अब तक कोई इंतजाम नहीं कर पाया है। चार दिनों से हो रही बारिश से बढ़ रहे नदियों के जलस्तर को देख गांव के लोग दहशत में है।
गोर्रा नदी के किनारे बसे करीब तीन हजार की आबादी वाले नरायनपुर गांव की 70 फीसद आबादी बंधे और नदी के बीच में बसी है। गोर्रा नदी इन दिनों गांव पर सीधे टक्कर मार रही है। हर साल आधा दर्जन मकान नदी में समां जाते हैं। सिंचाई विभाग बंधों को बचाने की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ लेता है। तहसील प्रशासन और जनप्रतिनिधि कटान के दौरान गांव वालों को सिर्फ आश्वासन देते हैं, पर कोई गांव को बचाने का प्रयास नहीं करता। गोर्रा नदी पर स्थित पुल का एप्रोच भी धीरे-धीरे कटान की जद में आ रहा है। यहां गोर्रा नदी गांव के जयराम साहनी, जयकिशुन, रामविलास मल्लाह, हरि साहनी के मकान पर सीधे टक्कर मार रही है। एक माह पहले एसडीएम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मनरेगा के तहत कटान को रोकने का निर्देश दिया, पर अब तक कोई निरोधात्मक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। गांव के लोग गोर्रा के बढ़ते जलस्तर को देख सहमे हैं। एसडीएम घनश्याम ने कहा कि सिंचाई विभाग को बंधों की सुरक्षा बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। नरायनपुर गांव के लोगों को बचाने का प्रयास जारी है।