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अलविदा की नमाज में उमड़े लोग, खैर और बरकत की दुआएं मांगी

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देवरिया। अलविदा की नमाज शुक्रवार को अकीदत के साथ अदा की गई। रोजेदारों ने अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगी। कई जगहों पर सड़क पर नमाज अदा करनी पड़ी। प्रति व्यक्ति 30 रुपये फितरा की रकम तय की गई है। प्रशासनिक और पुलिस अफसर गश्त करते रहे। उधर, ईद के नमाज का ऐलान भी कर दिया गया। ईदगाह में 7.30, जबकि जामा मस्जिद में आठ बजे अदा की जाएगी।
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27वां रमजान यानी अलविदा। सहरी के बाद शहर और देहात के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में तैयारी शुरू हो गई। मस्जिदों और घरों की सफाई में 10 बजे के बाद और तेजी आ गई। कुर्ता-पाजामा और सिर में टोपी लगाकर 12 बजे से मस्जिदों में बच्चों, युवा और बुजुर्गों के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो नमाज खड़ी होने तक जारी रहा। कुरआन की तिलावत, नफिल और वजीफा पढ़ने में मशगूल हो गए। पेश इमामों ने खुत्बा में कहा कि रमजान चंद दिनों में रुख्सत हो जाएगा। जो चंद दिन हम लोगों के पास है, उसे अल्लाह और रसूल के सुन्नत पर अमल करने में गुजारें। इसके बाद ही दुनिया और आखिरत में कामयाबी मिल सकेगी। जामा मस्जिद के ग्राउंड में टेंट लगाया गया था। यहां भी नमाजियों की सफे भर गई थी। मस्जिदों के पेश इमाम ने आपसी मशविरा से प्रति शख्स 30 रुपये फितरा की रकम तय की है। इस रकम को गरीब, मिस्कीन, लाचार, बेबस और आर्थिक तौर पर कमजोर हैं। जिसके पास खाने के लिए खाना और पहनने के लिए कपड़ा तक न हो। ऐसे लोगों को फितरा की रकम अदा कर दें। उलेमाओं ने कहा है कि यह रकम ईद की नमाज से पहले हर हाल में अदा कर दें। ताकि वह लोग भी ईद की खुशियां में शरीक हो सके। साथ ही फितरा के अदायगी की सार्थकता बरकरार रहे।

आखिरी शबे कद्र आज
अगर इबादत में चूक गए हैं तो आपके पास एक मौका और है। 28वें रमजान यानी शनिवार की रात को आखिरी शबे कद्र हैं हालांकि रमजान का हर लम्हा कीमती है। इस रात को इबादत में जरूर गुजारें।
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चांद रात में करें इबादत
चांद रात की फजीलत अधिक है। इसे इनाम की रात कहा जाता है। अल्लाह रोजेदारों को इस रात को इनाम से नवाजता है। उलेमाओं ने 25 जून को ईद के चांद का दीदार करने की अपील की है। इफ्तार के वक्त आसमान में चांद नजर आया अथवा दूसरे जगहों से चांद की तस्दीक हुई तो 26 जून को ईद मनेगी वर्ना 27 जून को ईद तय है। चांद रात की इबादत अफजल मानी जाती है। उलेमाओं ने इस रात इबादत की अपील की है।
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