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डॉक्टर के इंतजार में बढ़ रहा मर्ज

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जिला अस्पताल में इलाज के लिए उमडे मरीज - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। एक रुपये में इलाज मुहैया कराने की सरकारी कोशिशें दम तोड़ रही है। डॉक्टरों का ओपीडी में समय से नहीं बैठना और इलाज के लिए इंतजार करना मर्ज का दर्द और बढ़ा रहा है। इसकी वजह सुबह सरकारी डॉक्टरों का आवास पर निजी प्रैक्टिस करना बताया जा रहा है। गुरुवार को जिला अस्पताल का ऐसा ही हाल रहा। यहां आए मरीजों को घंटों इंतजार के बाद परेशानियों के बीच इलाज मिला।
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सात दशक पूर्व बने जिला अस्पताल का विस्तार भले ही कम हुआ है, लेकिन मरीजों की संख्या में दस गुना इजाफा हुआ है। गुरुवार को 1332 मरीजों ने इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। अस्पताल सुबह आठ बजे से ही खुल जाना है, लेकिन गुरुवार को नौ बजे इलाज के बाद पर्ची कटना ही शुरू हुई। पुरुष और महिलाओं की लंबी कतार काउंटर पर खड़ी रही। इस दौरान आपस में लोगों के बीच कई बार नोंकझोंक भी हुई, लेकिन होमगार्डों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया। ढाई घंटे बाद 10.30 बजे डॉ. एएम वर्मा और डॉ. अनूप श्रीवास्तव पहुंचे और ओपीडी में उमड़ी मरीजों को देखना शुरू किया। ओपीडी कक्ष में डॉक्टर के प्राइवेट वर्कर पर्ची जमा कर डॉक्टर को वार्डों में राउंड पर होने की बात बताते रहे। उधर, वार्ड में भर्ती मरीज भी परेशान नजर आए। सच्चाई यह थी कि डॉक्टर नहीं तो समय से ओपीडी में आए थे और न ही वार्ड में राउंड पर थे। करीब 11.20 बजे बालरोग विशेषज्ञ डॉ. रामसकल यादव, करीब 12 बजे डॉ. डीके सिंह, डॉ. आरके श्रीवास्तव और दोपहर करीब एक बजे डॉ. सौरभ द्विवेदी पहुंचे। इसके बाद डॉ. एएम वर्मा वार्ड में राउंड पर निकले। हड्डी रोग चिकित्सक के ओटी में जाने के कारण कक्ष के बाहर लंबी कतार लगी थी। वहीं डॉ. एचके मिश्रा छुट्टी पर थे।

जिला अस्पताल में 29 डॉक्टरों का पद स्वीकृत है, लेकिन 24 की तैनाती है। विलंब से डॉक्टरों की आने की लगातार शिकायत मिल रही है। हिदायत दी गई है। अब वह खुद चेक करेंगे। सुधार नहीं होने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. छोटेलाल, सीएमएस, जिला अस्पताल।

मरीज बोले : सिस्टम में सुधार लाने की जरूरत
हरफोड़ा गांव निवासी मो. अताउल्लाह ने बताया कि एक घंटे कतार में खड़ा होने के बाद पर्ची कटा है। नंबर लगाया हूं, लेकिन डॉक्टर के इंतजार में बैठा हूं। चौमुखा गांव निवासी राजेंद्र दुबे ने बताया कि ओपीडी में समय से डॉक्टर नहीं बैठ रहे हैं। दूरदराज से आने वाले मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। चतुरी गांव के रामेश्वर ने बताया कि चक्कर आ रहा है। नौ बजे से इलाज के लिए परेशान हूं। एक बज रहा है, लेकिन नंबर नहीं आ सका। गड़ेर गांव निवासी कृष्णकुमार उपाध्याय ने बताया कि सरकारी अस्पताल सिर्फ नाम का है। डॉक्टरों की मनमानी पर रोक लगना चाहिए।

100 से अधिक मरीज वापस लौटे
डॉक्टरों के वर्कर मरीजों का पर्ची लगाने में खेल करते हैं। सुबह से आए मरीजों का नंबर बाद में आता है। बाद में आए मरीजों को पहले इलाज मिलता है। इसके कारण शुक्रवार को 100 से अधिक मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा। पैथालॉजी में 12 बजे के बाद जांच के लिए रक्त नहीं लेने पर लोगों को निजी पैथालॉजी पर जांच के लिए जाना पड़ता है।
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