कपरवार संगम तट पर कटान करती घाघरा
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बरहज। करीब छह माह से जारी घाघरा नदी के कटान से किसानों के खेत एक-एक कर नदी में विलीन हो रहे हैं। कपरवार संगम तट से कटइलवा तक हो रहे बेतहाशा कटान से ग्रामीण परेशान हैं। उनका कहना है कि अभी तक किसी ने सुध नहीं ली है, जबकि बाढ़ के समय प्रशासन गांव खाली कराने पहुंच जाता है।
घाघरा तट पर बसे गांवों के लोगों का बाढ़ के समय जीवन मुश्किल हो जाता है। पिछली बाढ़ में कटइलवा में मुखलाल यादव, जवाहिर, रामजी और चिरकुट के घर के समीप नदी गांव को आगोश में लेने को मचल रही थी। हालांकि प्रशासन ने बंबो क्रेट आदि लगाकर गांव को बचा लिया था। नदी की धारा को देखते हुए कटइलवा से कपरवार संगम तट तक बोल्डर, स्पर आदि के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। बाढ़ समाप्त होते ही यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। कटइलवा के मंगल चौधरी, छांगुर चौधरी, कपरवार के राजेंद्र नारायण सिंह, सूर्यदेव सिंह, कृष्ण देव, त्रियुगी नारायण, गंगा यादव, ठाकुर यादव, संतकुमार, जनार्दन सिंह आदि किसानों के सैकड़ों एकड़ खेत नदी में कट चुके हैं। बेमौसम हो रहे कटान से शिवकुमार गोंड़, वृद्धि मद्देशिया, फेंकू और रामजी आदि का कहना है कि प्रशासन के ढुलमुल रवैये से 2007-15 तक कुरह परसियां एवं गोरखपुर जनपद का कोलखास गांव कट चुका है। कटान का यही आलम रहा तो रामजानकी मार्ग, कुवाइच टोला, मठियां, गौरा-कटइलवा और बरहज नगर का आधा हिस्सा कटान की जद में आ जाएगा। एसडीएम अरुण कुमार सिंह ने कहा कि इस्टीमेट भेजा गया है। धन अवमुक्त होते ही कटान रोकने के पुख्ता इंतजाम करा दिए जाएंगे।