एकौना,रुद्रपुर (देवरिया) । बीस दिन तक बाढ़ के पानी से घिरे रहने के बाद दोआबा के लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ितों की जिदंगी पटरी पर लौटती नजर नहीं आ रही है। बिजली, सड़क, राशन की दुर्दशा झेल रहे लोग गला तर के लिए एक बूंद स्वच्छ जल को तरस रहे है। अधिकांश परिवारों को बाढ़ का जमा पानी पीकर जिंदगी काटनी पड़ रही है, जिससे लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है।
दोआबा के 52 गांव में आई बाढ़ का पानी कम हो गया है, पर आवागमन चालू नहीं हो पाया है। कई जगहों पर मुख्य मार्गों पर हुए भारी कटान से सड़क के बीच करीब बीस फिट तक गड्ढे बने है। गांवों में लगे हैंडपंप बाढ़ के दौरान उल्टा पानी फेंकने से अब खराब हो गए है। ऐसे में लोगों को पानी के लिए भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। मकान गिरने के बाद मराछी टोला, पलिया, बैदा, पचलड़ी, ईश्वरपुरा, अनुसा, बेलवा दुबौली, लालपुर परसिया आदि गांवों के कई परिवार बंधों पर शरण लिए है। बंधों पर शरण के लिए लोगों के पहले पानी के टैंक लगे थे, अब वह भी हटा दिए गए है। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों को जल के लिए भटकना पड़ रहा है। प्यास बुझाने को बंधों पर शरण लिए लोग बाढ़ का जमा पानी पी रहे है। रविवार को नरायनपुर बजरंग चौराहे के बीच गड्ढे में जमा पानी एक बालक पी रहा है। पूछने पर बताया कि हैंडपंप खराब पड़े है। प्यास बुझाने को लोग गंदा पानी पीकर काम चला रहे है। बाढ़ पीड़ितों के पेयजल को लेकर अब कोई कार्य शुरू नहीं हुए। इस बाबत खंड विकास अधिकारी रामबिलाश राय ने कहा कि हैंडपंपों को दुरूस्त कराने का काम शुरू कर दिया गया है। बाढ़ पीड़ितों के लिए आवास और पानी का इंतजाम तेजी से कराया जा रहा है।