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बीएसए कार्यालय के फाइलों में दबा है जिले में फर्जी शिक्षकों का मामला

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संदेह के घेरे में 500 से अधिक शिक्षकों के प्रमाण पत्र
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पांच माह पूर्व शासन ने फर्जी शिक्षकों की जांच का दिया था आदेश
त्रिस्तरीय जांच समिति चुनाव में व्यस्त, नहीं तैयार हो पाई शिक्षकों की कुंडली
बीएसए कार्यालय के फाइलों में दबा है जिले में फर्जी शिक्षकों का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। पिछले पांच माह से शासन के निर्देश पर बीएसए कार्यालय नौ वर्ष पूर्व के भर्ती हुए शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कर रहा है। हालांकि अभी भी वह फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों को चिन्हित नहीं कर पाया है। शासन से गठित त्रिस्तरीय जांच समिति भी चुनाव प्रक्रिया में व्यस्त होने के चलते अभी इस मामले की ओर ध्यान नहीं दे पा रही है। सही तरीके से जांच हो तो नौ वर्ष के पूर्व हुुए भर्तियों में भी अधिकारियों और बाबुओं की मिलीभगत से बड़ा खेल किए जाने की पुष्टि होगी।
फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे जिले के सात शिक्षकों की बर्खास्तगी के साथ ही एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ चुका है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी हासिल किए लोगों के खिलाफ जांच चल रही है। पहले मथुरा, एटा में बड़े पैमाने पर भर्ती में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ और फिर सिद्धार्थनगर जिले में कई शिक्षकों के फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने का खुलासा हुआ। खास बात यह रही कि इसमें डेढ़ दर्जन से अधिक शिक्षक देवरिया जिले के निवासी हैं। फर्जी शिक्षकों के मामले में शुरू से ही देवरिया जनपद शासन की रडार पर रहा है। सूत्रों की मानें तो बीते वर्षों में जिले के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से जाली दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों लोगों ने नौकरी हासिल की है। कई ब्लॉकों में उनकी तैनाती भी है। पिछले साल वर्ष 2010 से अब तक हुई शिक्षक भर्ती के अंतर्गत रखे गए शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की पुन: जांच कराने का आदेश जारी हुआ था। इसमें ऐसे शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच गंभीरता से करने का निर्देश जारी हुआ जिन्होंने देश के अन्य प्रांतों से बीएड, बीटीसी, स्नातक, परास्नातक सहित अन्य डिग्री डिप्लोमा कोर्स किए हैं। उधर जनवरी माह में डीएम की ओर गठित त्रिस्तरीय जांच समिति ने भी जांच प्रक्रिया को बढ़ाया था और कई शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को चिन्हित भी किया था। हालांकि पिछले पांच माह से समिति किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।
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जनवरी में त्रिस्तरीय जांच समिति ने जो रिपोर्ट मांगी थी, उसे उपलब्ध करा दिया गया था। अभी चुनाव के चलते इस प्रक्रिया की प्रगति थोड़ी धीमी है। चुनाव के बाद इसमें तेजी आने की उम्मीद है। जिनके भी प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- ओमप्रकाश यादव, बीएसए
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