देवरिया। जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवा बीमार हो चुकी है। उसे कड़वी दवा की जरूरत है। अस्पतालों का हाल यह है कि कहीं डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं अन्य जरूरी संसाधनों का अभाव है। 15 से अधिक न्यू पीएचसी ऐसे हैं, जहां डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं है। वहीं 41 न्यू पीएचसी व पीएचसी पर सप्ताह में तीन दिन के लिए डॉक्टरों को संबद्ध किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टरों के रात्रि प्रवास नहीं करने से अस्पतालों पर इमरजेंसी सेवाएं भी पूरी तरह ठप है। नतीजा घर के नजदीक मरीजों को सस्ता इलाज देने का दावा हवाहवाई साबित हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 16 सीएचसी, 15 पीएचसी और 65 न्यू पीएचसी हैं। इनमें 206 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष महज 117 चिकित्सकों की ही तैनाती है। पूरे जिले में 89 डॉक्टरों की कमी है। कमोवेश यही हाल वार्ड ब्वाय का भी है। 98 पदों के सापेक्ष 56 वार्ड ब्वाय जिले में तैनात हैं। सिर्फ 12 चीफ फार्मासिस्ट की नियुक्ति हैं। मानव संसाधन की कमी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाके में 15 से अधिक ऐसी न्यू पीएचसी है, जहां पर डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। 41 न्यू पीएचसी व पीएचसी पर सप्ताह में तीन के लिए डॉक्टरों को संबद्ध किया गया है। अन्य दिन फार्मासिस्ट ही अस्पताल चलाते हैं। शासन ने चिकित्सकों को गांव में निवास करने का निर्देश दिया है, लेकिन जिले में यह आदेश पूरी तरह बेअसर है। अधिकांश पीएचसी, न्यू पीएचसी पर डॉक्टर नहीं रुकते। मरीजों को सीधे जिले पर रेफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी, बेड फुल
ग्रामीण इलाके के अस्पतालों पर डॉक्टरों की तैनाती नहीं होने के कारण जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अस्पताल का बेड फुल होने के कारण मरीजों को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जा रहा है। अगर ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य सेवा बेहतर हो जाए तो जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।
निजी प्रैक्टिस से मालामाल हो रहे सरकारी डॉक्टर
जिला अस्पताल और ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में मशगूल हैं। ओपीडी में सुबह समय से नहीं बैठते हैं और अस्पताल आने वाले मरीज को बेहतर इलाज का झांसा देकर अपने आवास या जहां पर प्रैक्टिस करते हैं, वहां पर बुलाते हैं। जिला अस्पताल के अधिकांश सरकारी अस्पताल प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार खामोश हैं।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। ह्दय रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक फिजीशियन की तैनाती स्वीकृत पद के अनुसार नहीं है। इस लिए ह्दय रोगियों को मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। इसके लिए सीएमएस की ओर से कई बार शासन को पत्र भी लिखा गया। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिले।
डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं कमजोर हैं। सीएचसी पर तैनात डॉक्टरों को नजदीकी पीएचसी-न्यू पीएचसी पर सप्ताह में तीन दिन के लिए संबद्ध किया गया है। इसके अलावा फार्मासिस्टों की मौजूदगी रहती है। डॉक्टरों के लिए विभागीय पत्राचार किया जा रहा है।
- डॉ. धीरेंद्र कुमार, सीएमओ।
जिले की स्वास्थ्य सुविधा बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हूं। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से कई बार मिल चुका हूं। मेरे ही पहल पर जिले को करीब 56 नए डॉक्टर मिले थे, लेकिन कुछ ही डॉक्टर ज्वाइन किए। मेडिकल कॉलेज का भी बहुत जल्द शिलान्यास होगा।
- कलराज मिश्र, पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद।