दो विभागों की खींचतान में बिगड़ी शहर की सूरत
प्वाइंटर
33 साल पुराने मास्टर प्लान पर काम कर रहा नगर विकास विभाग
आबादी और जरूरतों के अनुसार नहीं बढ़े संसाधन, अतिक्रमण से सिकुड़ी सड़कें
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। शहरों को स्मार्ट बनाने की मुहिम के बीच देवरिया का साढ़े तीन दशक पुराना मास्टर प्लान शहर के सुव्यवस्थित विकास में बाधा बन रहा है। 33 वर्षों में आबादी कई गुना बढ़ चुकी है। लोगों की जरूरतें बढ़ी हैं, जबकि उस अनुपात में सुविधाएं और संसाधन नहीं बढ़े। नए आवासीय इलाके बढ़े हैं। मगर पुराने प्लान में इसका कोई जिक्र ही नहीं होने से शहर की सूरत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। 22 फीट की सड़कें 15 फीट में ही सिमटकर रह गई हैं। नक्शा नहीं होने का हवाला देकर नगर पालिका अपनी ही सड़कों से अतिक्रमण हटाने में पीछे हट रही है। जबकि नगर विकास विभाग सड़कों से अतिक्रमण नहीं हटवाने का ठीकरा पालिका प्रशासन पर फोड़ रहा है।
1952 में शहर में नगर पालिका की स्थापना की गई। तब से 1985 तक भवन निर्माण के लिए नगर पालिका नक्शा जारी करती रही। नगर विकास विभाग की ओर से नगर क्षेत्र का सर्वे कराया गया। सुव्यवस्थित शहर बसाने के लिए नया मास्टर प्लान तैयार हुआ। भवन निर्माण के लिए नक्शा पास करने का जिम्मा नगर विकास विभाग को दे दिया गया। शहर में औसतन 600 नए मकानों का सालाना निर्माण हो रहा है। हाल ये है कि 33 साल पुराने नक्शे से नगर विकास विभाग मकान तैयार करा रहा है। इसके चलते शहर में अतिक्रमण की समस्या बढ़ती जा रही है। नगर पालिका की सड़क पर घर बना चुके भवन स्वामी नगर विकास विभाग से मिले नक्शे की दुहाई देते हैं। आम लोगों की शिकायत पर कार्रवाई के लिए पहुंची निर्माण विभाग की टीम के पास नक्शा नहीं होता। इसके लिए उसे फिर नगर विकास विभाग से मदद लेनी पड़ती है। अब दोनों विभागों की आपसी खींचतान में शहर का नक्शा बिगड़ता जा रहा है। चौड़ी सड़कें गलियों का रूप ले चुकी हैं। अवैध रूप से सड़क कब्जाने को लेकर नगरपालिका में शिकायतों का अंबार है। बावजूद दोनों विभाग एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं।
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नक्शे में कई कॉलोनियों का जिक्र नहीं
नगर पालिका की स्थापना हुए 76 साल बीत गए। शुरुआती दौर से ही वार्डों की संख्या 25 बरकरार रह गई। जब 1985 में शहर का मास्टर प्लान तैयार हुआ उस समय शहर में भवनों की संख्या तकरीबन छह हजार थी। आज शहर में भवनों की संख्या 25 हजार तक पहुंच गई है। आबादी बढ़ती गई शहर की सीमा जस की तस रही। तब से आज तक दर्जनों नई कॉलोनियां बन चुकी हैं। नगर विकास विभाग के पास मौजूद मास्टर प्लान में इन कॉलोनियों का जिक्र तक नहीं है। विभागीय कर्मचारी अपने मर्जी के अनुसार भवनों के नक्शे तैयार करते हैं। जो आगे चलकर अक्सर विवाद के कारण बन रहे हैं।
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इन्फो
- 600 नए मकानों का शहर में औसतन सालाना निर्माण हो रहा है
- 1985 में तैयार हुआ था शहर का मास्टर प्लान
- 06 हजार थी तब भवनों की संख्या
- 03 गुना से अधिक बढ़ चुकी है शहर की आबादी
- 02 दर्जन से अधिक बसे हैं नए आवासीय इलाके
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नहीं तोड़े जा सके अवैध निर्माण
नगर पालिका की सड़कों पर अवैध निर्माण की शिकायतें अक्सर आती रहती हैं। शहर का मास्टर प्लान नहीं होने के चलते हम भवन नहीं गिरवा पाते। इसके लिए नगर विकास विभाग को पत्र भेजे जाते हैं। उनकी स्वीकृति के बाद ही आगे कदम उठाया जा सकता है। मेरे कार्यकाल में एक भी अवैध पक्का निर्माण नहीं गिराया गया है। - आरके अग्निहोत्री, सहायक अभियंता, नगर पालिका
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800 लोगों पर दर्ज हुआ है केस
अवैध निर्माण को लेकर नगर विकास विभाग की ओर से करीब 800 लोगों पर केस दर्ज कराया गया है। सभी मामले न्यायालय में लंबित हैं। इसके चलते कोई अवैध निर्माण तोड़ा नहीं जा सका है। मास्टर प्लान का नक्शा 33 साल पुराना है। फिर भी सुव्यवस्थित भवन, मार्ग आदि का ख्याल रखकर भवन के लिए लोगों को नक्शा दिया जाता है। नया नक्शा तैयार कराने की कवायद शुरू की जा रही है। - राकेश कुमार, जेई नगर विकास विभाग