शहीद पति के शव दरवाजे पर आने के बाद कृषि मंत्री से वार्ता करती विजय लक्ष्मी
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देवरिया। सीएम से शहीद की पत्नी विजयलक्ष्मी ने दो मिनट तक मोबाइल पर बात की। सांत्वना दे रहे सीएम से विजयलक्ष्मी बोलीं कि मेरी एक ही गुजारिश है कि एक मिनट के लिए ही आ जाइए। मुझे पैसा, नौकरी नहीं चाहिए। बस यही मांग है। नहीं आए तो इकलौती बच्ची के साथ जान दे दूंगी, लेकिन शव नहीं जाने दूंगी। पत्नी की मार्मिक पुकार सुन मौके पर मौजूद प्रभारी मंत्री अनुपमा जायसवाल, कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही और सलेमपुर सांसद रवींद्र कुशवाहा की आंखें भर आईं। परिस्थितियों का हवाला देते हुए सबने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन विजयलक्ष्मी अपनी बात पर अटल रहीं।
दोपहर करीब एक बजे प्रभारी मंत्री अनुपमा जायसवाल, कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही, विधायक सुरेश तिवारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, पूर्व विधायक गंगा सिंह कुशवाहा समेत सत्ता पक्ष के कई नेता गमजदा पत्नी विजयलक्ष्मी के पास पहुंचे। सूर्यप्रताप शाही ने सीएम को फोन कर शहीद की पत्नी को बात करने के लिए मोबाइल दिया। हाथ में मोबाइल थामते ही विजयलक्ष्मी फूट-फूटकर रोने लगीं और बोली सीएम साहब मेरी सिर्फ एक ही रिक्वेस्ट है कि आप एक मिनट के लिए मेरे घर आएं। जो होना था वह तो हो गया। अब यही मांग है, नहीं तो अपनी इकलौती बच्ची के साथ जान दे दूंगी मगर दरवाजे से शव नहीं उठने दूंगी। इसके बाद फोन कट गया और स्थानीय नेताओं ने काफी समझाने की कोशिश की। डीएम ने हाथ जोड़कर मान जाने की विनती की, लेकिन विजयलक्ष्मी ने किसी की नहीं सुनी। शहीद का पार्थिव शरीर करीब चार बजे कड़ी सुरक्षा के बीच दरवाजे पर पहुंचा तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। अंदर से बाहर तक चीख पुकार मच गई। ‘विजय भइया अमर रहे’ के नारों से गांव गूंज उठा। सीआरपीएफ जवानों ने जिस कमरे में पत्नी थीं, वहां पर ताबूत ले गए, विजयलक्ष्मी ताबूत को देख बदहवाश हो गईं। इस क्षण को देख सभी की आंखें नम हो गई।