देवरिया। साहब, ठंड तो हमें भी लगती है। बस हम बच्चे आपसे अपनी पीड़ा जाहिर नहीं कर पाते। करें भी तो किससे, सुनने वाला ही कौन है। आपके मातहत तो आंख-कान बंद कर बैठे हैं। बंद कमरों में ऊंची कुर्सियों पर बैठने के बाद भी उन्हें हीटर, ब्लोअर की जरूरत होती है, पर हमारा क्या। हम गांव, गरीब, साधनहीन परिवारों के बच्चे हैं। इसीलिए तो हम पर किसी की नजर नहीं है। हां, अगर हम भी आप जैसे ओहदेदारों के बच्चे होते तो बिन कहे हमारी आवाज पहुंच जाती। कड़ाके की ठंड में ठंडे फर्श पर बैठने में कितनी दुश्वारी होती है, यह हम ही जानते हैं। इस व्यवस्था ने तो हमें मार ही डाला था, बस गनीमत है कि सूर्यदेव थोड़े मेहरबान हैं। लिहाजा क्लासरूम से बाहर आकर धूप में पढ़ाई हो जाती है, हालांकि यहां भी बर्फीली हवाओं का सितम झेलना पड़ता है। कुछ ऐसी ही व्यथा है, परिषदीय स्कूल के उन बच्चों की जिन्हें शासन-प्रशासन की ओर से बेहतर शिक्षा और अच्छी सुविधाओं के दावों के बावजूद फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। कुछ स्कूलों में पतली टाट-पट्टी है तो कइयों में वह भी नदारद है। बच्चे खुद घर से बोरा लेकर पढ़ाई करने आ रहे हैं। जिले के तमाम स्कूलों में कमोवेश यही हाल हैं। कायाकल्प योजना के तहत फर्श पर टाइल्स बिछने के बाद तो दिक्कत और बढ़ गई है। टाइल्स इतना ठंडा रहता है कि उस पर कुछ देर नंगे पांव खड़े रहना भी संभव नहीं। साधनहीन परिवारों के बच्चे कड़ाके की ठंड में सुबह ही स्कूल आ जाते हैं और फिर सीलन भरे कमरों में ठंडे फर्श या उस पर बिछे पतली टाट-दरी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर होते हैं। विभाग के जिम्मेदार इससे पूरी तरह बेखबर बने हैं। उनकी ओर से बेंच-कुर्सी की व्यवस्था सिर्फ कागज में की जा रही है।
केस एक: प्राथमिक विद्यालय शामपुर
देसही देवरिया ब्लॉक के इस प्राथमिक विद्यालय में 50 बच्चे हैं। बच्चों की पढ़ाई कमरों के बाहर धूप में बैठाकर कराई जा रही है। वैसे तो कमरों में टाइल्स लगी हुई है। बाउंड्री भी है, लेकिन टेबल-कुर्सी नहीं है। ठंड से ठिठुरते बच्चे प्लास्टिक की चटाई पर बैठकर पढ़ाई करने में मगन हैं। प्रधानाध्यापक मनोज मिश्र ने बताया कि टाइल्स और बाउंड्री होने से विद्यालय की सुंदरता तो बढ़ गई है, मगर फर्नीचर नहीं होने से बच्चों को टाटपट्टी पर बैठाना पड़ रहा है। उन्हें ठंड लगने का डर है।
केस दो: प्राथमिक विद्यालय पकड़िहवा
बैतालपुर ब्लॉक के इस विद्यालय में शुक्रवार को 40 बच्चे नामांकित हैं। उन्हें धूप में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। टाट-पट्टी नहीं होने से कुछ बच्चों के घर से लाए गए प्लास्टिक के बोरों को जोड़कर टाट का रूप दिया गया है। इसी पर बैठकर बच्चे पढ़ाई करते हैं। धूप से राहत महसूस करते बच्चे ठंडी हवा के झोंको से कांपते दिखे। सहायक अध्यापक सुनील यादव ने बताया कि जो व्यवस्था, उसी में काम करना है। बच्चों की पीड़ा नहीं देखी जाती, मगर हम भी मजबूर हैं।
केस तीन: प्राथमिक विद्यालय रामपुर दुबे
बैतालपुर ब्लॉक के इस विद्यालय में बच्चों की संख्या 63 है, जबकि उपस्थित 50 फीसदी भी नहीं रही। प्राथमिक विद्यालय में कमरों में फर्श टूटी हुई है। दरी बिछाकर बच्चों को उसी पर बैठाया गया है। ठंड से बेहाल बच्चे बार-बार अपने पांवों को सिकोड़ते नजर आए। प्रधानाध्यापक कृष्णध्यान पांडेय ने बताया कि बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की मांग की गई है। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से व्यवस्था संचालित की जा रही है।
प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। टाट-पट्टी उपलब्ध कराया गया है, बच्चों को उसी पर बैठाया जाता है। समस्या के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उनके निर्देशानुसार कार्रवाई होगी।
- डीएन चंद, बीईओ, देसही देवरिया।
जिले की प्रभारी हैं बेसिक शिक्षा मंत्री
प्राथमिक विद्यालयों में संसाधनों की यह व्यवस्था तब है, जब इस जिले की प्रभारी सूबे की बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल हैं। हर माह उनका आगमन होता है। अपने भाषणों में वह शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के दावे करने से गुरेज नहीं करतीं, मगर उन्हीं के जिले में स्कूलों की यह दशा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
आज आएंगी प्रभारी मंत्री
जिले की प्रभारी मंत्री अनुपमा जायसवाल पांच जनवरी को जिले में होंगी। वह सुबह 10 बजे बैतालपुर ब्लॉक में कंबल वितरित करेंगी। इसके बाद 11 बजे से जिला योजना समिति की बैठक में शामिल होंगी। दोपहर एक बजे शिक्षक प्रकोष्ठ सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोपहर तीन बजे ट्रेन से गोंडा के लिए रवाना होंगी।