खुखुंदू। घर में खेल रहे डेढ़ वर्ष के बच्चे को सांप ने डंस लिया। परिजनों को इसकी जानकारी तब हुई, जब बच्चे के मुंह से झाग निकलना शुरू हुआ। आनन-फानन में परिजन जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हालांकि इसके बाद भी शुक्रवार की शाम तक परिजन झाड़-फूंक में जुटे हुए हैं। घटना खुखुंदू थाना क्षेत्र के सरया गांव की है। सरयां गांव निवासी संजय सिंह का डेढ़ वर्षीय बेटा शिवम सिंह गुरुवार की दोपहर घर में वॉकर में खेल रहा था। इसी दौरान जहरीले सर्प ने उसे डंस लिया। काफी देर तक परिजनों को जानकारी नहीं हुई। मां सरोज सिंह जब बच्चे को दूध पिलाने के लिए लेकर बैठी तो उसके पैर से खून टपकते देख सन्न रह गईं। पहले तो सोचा कि खेलते समय चोट लग गई होगी, लेकिन जब मुंह से झाग निकलने लगा तो हरकत में आई। कुछ ही देर में शिवम बेहोश हो गया। उसका शरीर नीला पड़ने लगा। सरोज सिंह ने सूचना पति को दी। आनन-फानन में शिवम को खुखुंदू पीएचसी और फिर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजन इसके बाद घर आए। शंका होने पर सपेरा बुलाया गया। सपेरे ने घर के अंदर से सर्प निकाला और उसे पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया। इसके बाद परिजन सर्प और बालक लेकर अमवा की सती माई से लगायत कई जगह जाकर झाड़फूंक करा चुके हैं। उधर शुक्रवार की दोपहर को सर्प ने भी दम तोड़ दिया। देर शाम तक परिजन बच्चे का शव लेकर इधर उधर भटक रहे हैं।
खुखुंदू। नियति का भी अजीब खेल है। पल भर में ही घर का इकलौता चिराग बुझ गया। बेटी पैदा होने के 12 साल बाद संजय सिंह के घर में बेटे की किलकारी गूंजी थी। उन्हें क्या पता था कि लंबे अरसे के बाद घर में आई खुशी चंद समय का मेहमान है। सर्प दंश से शिवम की मौत के बाद पूरे कुनबे में कोहराम मचा है। संजय सिंह छपरी पेशे से भोजपुरी कलाकार है। करीब 14 वर्ष पहले उनकी पत्नी सरोज को बेटी सानिया हुई। एक बेटे की चाह में दंपती ने मंदिरों में जाकर मन्नतें मांगी, मत्था टेका। करीब 12 वर्ष बाद भगवान ने उनकी सुन ली और बेटे के रूप में शिवम ने जन्म लिया। 12 वर्ष इंतजार के बाद घर में आई खुशियां पल भर में ही बिखर गईं। इकलौते बेटे के खोने के गम में मां सरोज का रो-रो कर बुरा हाल है। वह बार-बार बेहोश हो जा रही है। पिता संजय गुमसुम होकर बेटे के शव को एकटक निहार रहे हैं। देर शाम तक मृत बच्चे के शव को लेकर पिता जिंदा होने की उम्मीद में इधर-उधर भागते रहे। बताते हैं कि परिजन मृत बच्चे को गंगा लाभ देने के लिए बरहज सरयू तट पर शुक्रवार की दोपहर को चले गए। वहां से एक औघड़ ने बच्चे को जिंदा करने की बात कहकर फिर गांव के सिवान में भेज दिया। इकलौते बेटे के जिंदा होने की आस लगाकर बैठे पिता को देख सबकी आंखें नम हो जा रही थीं।