कपरवार। बरहज थानाक्षेत्र के भदिला प्रथम गांव में स्कूल की छुट्टी के बाद नदी पार कर घर जा रहे बच्चों से भरी नाव सरयू नदी में पलट गई। घटना गुरुवार के शाम की है। नाव पर 30 बच्चे सवार थे। इसमें सात बच्चे पानी में डूबने लगे। मछुआरों ने सतर्कता दिखाते हुए तत्काल उन्हें बाहर निकाला।
भदिला प्रथम गांव के बच्चे रोजाना पढ़ने के लिए गांव से सिधेगोर, डेरवा जाते हैं। बच्चों को गांव से राप्ती नदी पार कर स्कूल जाना होता है। गुरुवार की शाम स्कूल से छुट्टी होने के बाद बच्चे गांव जाने के लिए नाव पर सवार हुए। करीब 30 बच्चों से भरी नाव तट से थोड़ा आगे बढ़ी और डगमगाने लगी। इससे बच्चों में अफरातफरी मच गई। इसी बीच कक्षा दो के दिव्यांशु, कक्षा छह के मनीष यादव, सातवीं के शिवशंकर, पांचवीं के रवि यादव, एलकेजी के अंकित यादव, प्रथम की श्वेता, कक्षा दो के मनीष डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख पास में मछली मार रहे युवकों ने बचाया। यूकेजी की छात्रा नेहा का पैर फ्रैक्चर हो गया। उसका इलाज बड़हलगंज में एक निजी डॉक्टर के यहां कराया गया। यह तो संयोग रहा कि नाव गहरे पानी तक नहीं गई थी वरना बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे के बाद गांव के लोग सहमे हुए हैं। बहुत से बच्चे नाव की यात्रा कर स्कूल जाने से डर रहे है। गौरतलब है कि बच्चों से भरी नाव जब डूबने लगी तो बच्चे घबराकर शोर मचाना शुरू कर दिए। तट पर भदिला प्रथम गांव के गोलू साहनी, गौतम साहनी और सरया निवासी छबीला साहनी मछली मार रहे थे। वे मौके पर पहुंचे और डूब रहे बच्चों को पानी से बाहर निकाला। लोगों ने तीनों के साहस को सराहा।
हादसों का सफर और बस आश्वासनों की घुट्टी
कपरवार। राप्ती के पानी से घिरे बरहज के भदिला प्रथम गांव में मुश्किलें कम नहीं है। जान जोखिम में डाल रोज नाव से नदी पार आने-जाने वाले स्कूली बच्चे सहम रहे हैं। गत वर्षों में भी ऐसे हादसे होते रहे हैं। बाढ़ और बरसात से पूरा गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो जाता है। गांव के दो सौ से अधिक बच्चे पास के गांव दिस्तवलियां, पटना घाट, सिधेगोर, डेरवा, कपरवार पढ़ने जाते हैं। पिछले वर्ष नदी पार करते समय बच्चों से भरी नाव नदी में पलट गई थी। संयोग ही था कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस बार की घटना और पिछले वर्ष की घटना को लेकर बच्चे सहमे हैं। गांव के छेदी निषाद, दिनेश यादव, रामदुलार यादव बताते हैं कि नेतवार गांव होकर एक पुल बन जाने से हमेशा के लिए रास्ता हो जाता। जनप्रतिनिधि भी सिर्फ आश्वासन देते रहे हैं।