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नासूर बन रहा नदी का दिया जख्म

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सुरेंद्र वत्स
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रुद्रपुर। राप्ती और गोर्रा नदी ने रास्ता बदलकर न सिर्फ हर साल इलाके का भूगोल बदला, बल्कि तमाम जिंदगियों को ऐसा जख्म दिया जो साल दर साल नासूर बनता जा रहा है। नदी के मुहाने पर बसे चार गांवों को तीन बार तबाह कर चुकी गोर्रा अब पिड़री में एक बुजुर्ग दंपती की जिंदगी तबाह होने के कगार पर है।
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पिड़री गांव में पिड़रा भुसउल बांध और नदी के बीच बसे सवारी देवी और कमला उम्र के आखिरी पड़ाव पर नदी के कोप से जूझ रहे हैं। नदी मौत बनकर पीछा कर रही है। सिर छिपाने के लिए ले देकर उनके पास कटरैन का मकान है। मकान के ठीक नीचे भयंकर कटान हो रहा है। नदी का जलस्तर मकान को निगलने को बढ़ रही है। ऐसे में 70 वर्ष की सवारी देवी और पति कमला की देखरेख करने को कोई औलाद नहीं है। बेटियों की शादी होने के बाद ससुराल चली गईं। उम्र के इस पड़ाव पर कमला को मजदूरी करनी पड़ती है। सवारी देवी ने कहा कि नदी ने उनकी जिंदगी तबाह कर दी। उजड़ने और बसने में पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई। इससे पहले भी उनका मकान तबाह हो चुका है। अब उनके पास अन्यत्र बसने के लिए जमीन नहीं है। एसडीएम घनश्याम ने कहा कि बुजुर्ग दंपती के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।
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