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बेटियां बचाने को बिना गद्दी की साइकिल यात्रा

Wed, 13 Mar 2013 01:02 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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बिना किसी गद्दी की साइकिल पर हर दिन घंटों की पीड़ादायक यात्रा कर लोगों से बेटियों और वन संपदा बचाने के लिए आग्रह कर रहे हीरालाल यादव इन दिनों लखनऊ में है। मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले 56 वर्षीय हीरालाल यादव ने बताया कि 1997 से मिशन को लेकर शुरू हुई उनकी यात्रा में वे अब तक देश और विदेश की 16 यात्रा कर चुके हैं, जिनमें तीन यात्राएं थाईलैंड और कंबोडिया की है। ये उनकी 17वीं यात्रा है।
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यात्रा के दौरान साइकिल पर जरूरी सामानों का लगभग 25 किलो से अधिक वजन लेकर चलने वाले हीरालाल ने बताया कि उनके इस साइकिलिंग अभियान का एकमात्र उद्देश्य देश में लोगों को दिनोंदिन कम हो रही बेटियों को बचाना है। वे अपनी यात्रा के दौरान लोगों को वन संपदा बचाने के लिए भी जागरूक करते हैं। अब तक की सभी यात्राओं में लगभग 90 हजार किमी. साइकिल चलाने वाले हीरालाल इस दौरान स्पेशली डिजाइन्ड 6 साइकिलें भी बदल चुके हैं।

लखनऊ आने से पहले वे दिल्ली कांड में जान गंवा चुकी बहादुर बिटिया के बलिया स्थित गांव भी जा चुके हैं। बिना किसी गद्दी की साइकिल के अभियान पर उन्होंने कहा कि बेटियों को खोने की पीड़ा लोगों को महसूस कराने के लिए वे इस प्रकार की साइकिलिंग कर रहे हैं। समारोह में मुख्य अतिथि के अलावा न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह यादव, पर्यटन राज्यमंत्री मूलचंद्र चौहान, बृजभान सिंह यादव, रिटायर्ड सूचना अधिकारी बीके शुक्ला भी मौजूद रहे।
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मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की मां भी चलाएंगी साइकिल
बेटियों को बचाने के अभियान में निकले हीरालाल यादव ने बताया कि उनका मौजूदा अभियान अमृतसर तक जारी रहेगा। ऐसे में ताज पर आतंकी हमले में शहीद हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के माता-पिता उनका साथ देंगे। शहीद मेजर की मां धनलक्ष्मी 60 वर्ष की अवस्था में इन दिनों साइकिलिंग भी सीख रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रस्तावित एक यात्रा में वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ साइकिल चलाएंगे।
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