सूबे के अदालती परिसरों से अब कोर्ट की इजाजत के बगैर किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
यह आश्वासन डीजीपी देवराज नागर ने सोमवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को दिया।
हाईकोर्ट के गेट से 17 मई को एक कपल को पकड़ने की पुलिस की कोशिश के मामले में डीजीपी अदालत में पेश हुए थे। उनके साथ बहराइच के एसपी व निलंबित दरोगा भी थे।
खारिज हुई याचिका
वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने डीजीपी के आश्वासन के बाद कपल के वकील की जनहित याचिका खारिज कर दी।
याचिका में वकील प्रमेश कुमार ने 17 मई की घटना का हवाला देते हुए सूबे के कोर्ट परिसरों के पास से आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आग्रह किया था।
ये था पूरा मामला
उनका कहना था कि बहराइच के बौड़ी थाने से संबंधित मामले में वहां के दरोगा प्रेम नारायण ने युवती के घरवालों के साथ आकर हाईकोर्ट के गेट नंबर छह के पास युवक को खींचकर जबरन बोलेरो में बैठा लिया।
युवती को भी पुलिस वाहन में खींचने की कोशिश कर रही थी। जब वह बचाने पहुंचे तो उन्हें भी अगवा करने की कोशिश की गई।
बहला-फुसलाकर भगाने का था मसला
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने कोर्ट को बताया कि बौड़ी थाने में युवती को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के संबंध में 23 मार्च को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
आरोपी के खिलाफ 29 अप्रैल को गैर जमानती वारंट जारी हुआ था। इसी नाते दरोगा ने उसे पकड़ने की कोशिश की थी। दरोगा को निलंबित कर दिया गया है।