मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बयानबाजी से अल्पसंख्यक वोटों के डैमेज कंट्रोल में जुटे सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जानसठ ब्लाक के पूर्व प्रमुख वीरेंद्र कुतुबपुर ने जेएम द्वितीय कोर्ट में सपा सुप्रीमो के खिलाफ भड़काऊ बयान देने का परिवाद दायर किया है। वादी के बयान दर्ज करने के लिए कोर्ट ने 27 नवंबर की तिथि मुकर्रर की है।
शहीद चौक की सभा से लेकर नंगला मंदौड़ पंचायत तक दर्जनभर से अधिक जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भड़काऊ भाषण के मुकदमे दर्ज किए गए थे। भाजपा के सरधना विधायक संगीत सोम और थानाभवन विधायक सुरेश राणा पर रासुका लगाई गई थी।
वीरेंद्र कुतुबपुर ने जुडीशियल मजिस्ट्रेट द्वितीय आलोक श्रीवास्तव की कोर्ट में धारा 153ए, 504 और 506 में परिवाद दायर कराया। वीरेंद्र का कहना था कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पहली नवंबर को विभिन्न समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर जो बयान प्रकाशित और प्रसारित हुए, वह हिंदू-मुस्लिमों को बांटने वाले थे। बयान से ऐसा लग रहा है कि सपा प्रमुख दोनों पक्षों को आपस में लड़ाना चाहते हैं।
अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह ने बताया कि परिवाद में वादी के बयान के लिए कोर्ट ने 27 नवंबर की तिथि तय की है।
क्या बोले थे मुलायम?
मोहम्मदपुर राय सिंह के तिहरे हत्याकांड के बाद सपा प्रमुख ने 31 अक्तूबर को लखनऊ में दिए बयान में कहा था कि हिंसा करने वालों को सरकार कुचल देगी। इसके अलावा उनका दूसरा बयान था कि सरकार में रहें या न रहें, लेकिन मुस्लिमों का साथ नहीं छोड़ेंगे।
कौन हैं वीरेंद्र सिंह?
कुतुबपुर गांव के रहने वाले वीरेंद्र सिंह बसपा सरकार में कैबिनेट सचिव रहे शशांक शेखर के चचेरे भाई हैं। एक दौर में वह भाकियू में दूसरे नंबर की पोजीशन पर थे। प्रखर भाषण उनकी पहचान रही। नंगला मंदौड़ में 31 अगस्त को हिंदू-मुस्लिमों को भाई-भाई बताने पर मंच पर विरोध हुआ। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज और जेल जाना पड़ा। गोवर्धन पूजा कार्यक्रम से चर्चा में आए।