राजापुर स्थित हनुमान मंदिर में पहुंची चित्रकूट अध्ययन यात्रा।
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धर्मनगरी में चल रही चित्रकूट अध्ययन यात्रा रविवार शाम गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर पहुंची। जहां साधु-संतों ने यात्रा में शामिल युवकों को संत तुलसीदास के जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
साधु संतों ने बताया कि गरीब ब्राह्मण आत्माराम नाम के घर में तुलसीदास जन्म हुआ था। वह बचपन से ही विलक्षण प्रवृत्ति के थे। उनकी मां हुलसी देवी का देहांत होने पर चुनिया नामक महिला तुलसी का पालन पोषण करने लगी। राजापुर आए चित्रकूट के संत नरहरिदास तुलसी को अपने आश्रम चित्रकूट ले गए और दीक्षा दी। गुरू ने उन्हें विभिन्न ग्रंथों का अध्ययन कराया।
तुलसीदास का विवाह उनकी जन्मस्थली राजापुर के पास ही महेवा गांव में दीनबंधु पाठक की सुपुत्री रत्नावली से हुआ। अपनी पत्नी की प्रेरणा से ही वह भक्ति में लीन हो गए। कहा जाता है कि एक दिन जब तुलसीदास चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे बने चबूतरे में बैठे प्रवचन कर रहे थे तभी भगवान राम और लक्ष्मण उधर से गुजरे लेकिन तुलसीदास उन्हें पहचान नहीं पाए।
उसी रात तुलसीदास को सपने में हनुमानजी ने आकर इच्छा पूछी तो उन्होंने कहा कि वह भगवान के दर्शन करना चाहते हैं। तब हनुमानजी ने उनसे कुछ दिन और इंतजार करने को कहा। थोड़े दिन बाद जब तुलसी एक दिन उसी चबूतरे में बैठे श्रद्धालुआें को चंदन लगा रहे थे तभी भगवान राम लक्ष्मण और सीता आए और तुलसीदास से चंदन लगवाने लगे। इसके बाद तुलसीदास ने रामचरित मानस लिखी। यात्रा संयोजक संतोष बंसल ने बताया कि राजापुर से यात्रा तीर्थक्षेत्र स्फटिक शिला पहुंचेगी।