चित्रकूट। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास के लक्ष्य (एसडीजी) लैंगिक समानता व ग्रामोदय से सर्वोदय के लक्ष्य की प्राप्ति में परिवार एक महत्वपूर्ण आधार है। इसे लेकर दीनदयाल शोध संस्थान में आयोजित चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन लोहिया सभागार में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि भारत के विकसित स्वरूप को प्राप्त करने में महिला सशक्तिकरण अति आवश्यक है।
राज्य मंत्री ने कहा कि समाज एवं राष्ट्र को सशक्त बनाने में देश की महिलाओं की भूमिका सदैव अग्रणी रही है। महिलाएं समाज का अभिन्न अंग हैं। महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। जिसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में दिख रहे हैं। दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से होने वाले विमर्श की रूपरेखा प्रस्तुत की। संगठन सचिव अभय महाजन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। संचालन करते हुए डीआरआई के महाप्रबंधक अमिताभ वशिष्ठ ने बताया कि लैंगिक समानता एक सर्वव्यापी उद्देश्य है और इसे राष्ट्रीय नीतियों, बजटों और संस्थानों का मुख्य केंद्र होना चाहिए। डॉ. आशुतोष तिवारी ने भारत मे 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने का रोडमैप दर्शाया। डॉ आरती शनवाने, डीएम शिवशरणप्पा जीएन, सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी मौजूद रहे।