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हिंदू धर्म की रक्षा के लिए क्रांतिकारी कदम उठाने में नहीं करेंगे संकोच

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कथा के दौरान जगदगुरु रामभद्राचार्य से बात करते मलूकपीठ के पीठाधीश्वर राजेंद्रदास महराज। - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। भगवान कामदनाथ की तलहटी में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए उन्हें क्रांतिकारी कदम उठाने में संकोच नहीं है। इसीलिए ईश्वर ने कुछ अलग कार्य करने के लिए उन्हें भेजा है।
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कहा कि भारतीय संस्कृति मेरी प्रतीक्षा कर रही है, उसकी रक्षा करना मेरा धर्म है। आजकल के संतों में केवल धन एकत्र करने की होड़ मची है। मैं धन लाभ का घोर विरोधी हूं। लगभग एक घंटे की कथा में भगवान कामतानाथ के विग्रह की चर्चा की।
बृहस्पतिवार को कथा कार्यक्रम की अध्यक्षता मलूकपीठ के पीठाधीश्वर डॉ. आचार्य देवाचार्य राजेंद्र दास महाराज ने की। उन्होंने कहा कि आज हम सभी सनातन धर्म के एकमात्र आचार्य जगद्गुरु हैं। उनके पास बैठकर साहित्यिक चर्चा होती है।
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तुलसी पीठ के युवराज व उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने गुरुदेव के अलौकिक शक्ति अलौकिक कृपा का साक्षात दर्शन कराया। विश्वविद्यालय परिवार ने 72 किलो की माला पहनाकर स्वागत किया। कामता विधालय और राघव परिवार, तुलसीपीठ आश्रम द्वारा प्रसाद वितरण किया गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सांसद प्रभात झा ने गुरुदेव की अलौकिक शक्ति दर्शन के बारे में जनसमूह को बताया। प्रो. रमाकांत पांडेय काशी हिंदू विश्वविद्यालय की तरफ से अभिनंदन पत्र दिया। विधायक नीलांशु चतुर्वेदी, पूर्व विधायक दिनेश मिश्रा, राजा हेमराज चतुर्वेदी, मंडलायुक्त गौरव दयाल, डीएम शेषमणि पांडेय, आईजी के सत्यनारायण, एसपी अंकित मित्तल व यजमान नीलेश मेहता व धर्म पत्नी प्रीती मेहता मौजूद रहीं।
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