नोटबंदी का असर जिले के थोक सहित फुटकर कारोबार करने वालों पर पड़ने लगा है। किराना, रेडीमेड कपड़े सब्जी, ट्रांसपोर्ट, रेस्टोरेंट, सराफा कारोबार को तगड़ी चपत लग रही है। कारोबारियों का कहना है कि नोटबंदी से कारोबार आधा भी नहीं रहा गया है। हालात यह है कि अब कर्मचारियों के वेतन, अन्य खर्च निकालने की चिंता सता रही है।
शहर के किराना सहित फास्टफूड, ज्वैलर्स सहित फुटकर कारोबार करने वाले निराश हैं। सहालगी सीजन होने के कारण दुकानदार नवंबर माह का इंतजार कर रहे थे। नोटबंदी होने से उनकी हसरत धरी रह गई। दुकानों में बिक्री न दुकानदार मानसिक रूप से परेशान हैं।
बहुत से दुकानदार शहर के अंदर किराए की दुकान लिए हुए हैं। उनको चिंता सता रही है कि दुकानों का किराया और बिजली का बिल कैसे चुकाएंगे। लखनऊ बांदा ट्रांसपोर्ट के मैनेजर टिंकू सिंह और सतना कानपुर ट्रांसपोर्ट के मालिक लवकुश चतुर्वेदी ने बताया कि इस माह उनके ट्रांसपोर्ट में प्रत्येक दिन ट्रक माल लेकर आते थे। जब से नोटबंदी हुई मात्र दो ही गाड़ियां आयी है।
चित्रकूट। नोटबंदी का सब्जी के कारोबार पर भी खासा असर पड़ा है। थोक व फुटकर का कारोबार करने वाले भोले गुप्ता व नफीस खां ने बताया कि इन दिनों नोटबंदी से बड़ी परेशानी है। पिछला स्टाक ही बचा है और पेमेंट नहीं मिल रही है।
बड़े नोट बंदी से लेन-देन प्रभावित है। फुटकर सब्जी विक्रेता भरत व अंकित ने बताया कि लोग मजबूरी में ही दस, बीस रुपये की सब्जी खरीद रहे हैं। इसके अलावा बडे़ नोट लेकर आते हैं तो उन्हें लौटाना पड़ता है।