शहरी क्षेत्रों में कई बैंक होने के बाद भी लोगों को नोट बदलने और जमा करने में तेो परेशानी हो रही है। उससे कहीं ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र के खाताधारकों को हैं। बडे़ नोट बदलने के लिए सुबह से लाइन लगाते हैं और नंबर आते ही बैंक से कैश खत्म हो जाता है।
तो फिर दूसरे दिन आते हैं। यह क्रम पांच दिनों से चल रहा है। बैंक कर्मियों की मनमानी का भी शिकार ग्रामीण होते हैं। किसान परिवार ज्यादा परेशान हैं। छोटे नोट न होने और बैंक में रुपये जमा होने से खेती-किसानी पर प्रभाव पड़ने लगा है।
अधिकतर बैंक शहर व कस्बों में होने से गांवों में रहने वाले ग्रामीणों को रुपये निकालने और जमा करने के लिए पच्चीस से तीस किलो मीटर दूर से बैंकों में आना पड़ता है। इसके बाद भी रुपये न जमा होने से उन्हें दूसरे दिन लाइन में खड़ा होना पड़ता है।
जिले में सूदूर क्षेत्रों में गांव में रहने वाले ग्रामीण सबसे अधिक नोट बदलने की प्रक्रिया से परेशान हैं। ग्रामीण सुबह से ही बैंक में रुपये जमा करने व निकालने के लिए चल देते हैं। गांव अधिक दूरी में होने से जब वह बैंक मेें पहुंचते हैं तब तक बैंकों में लंबी लाइन लग जाती हैं।
इससे वह मानसिक रूप से परेशान है। इसके बाद भी वह लोग भी लाइन में लग जाते हेै। जब बैंक बंद हो जाते है तो निराश होकर लौट जाते हैं।
रमयापुर गांव के चंद्रभान शुक्ला ने बताया कि गांव से 10 किमी दूर बेडी पुलिया स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में खाता है।
सुबह नौ बजे से लाइन में लगे हैं। उनके पास चार पांच सौ की नोट है। जिसे बदलने के बाद खाद खरीदनी है। दो दिन से लौटने केे बाद आज तीसरे दिन लाइन में है। दो दिन तक नंबर ही नहीं आया और बैंक बंद हो गया था। यदि खाद नहीं मिली तो खेत में फसल लगाने में परेशानी आएगी।
पतेरिया गांव के आत्म नारायण ने बताया कि उनका गांव भी 15 किलो मीटर दूर पड़ता है। गांव से सुबह पांच बजे चले हैं। आठ बजे लाइन में लग गये। तब जाकर दोपहर एक बजे नंबर आया।