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प्रोत्साहन मिलता तो हम भी लाते मेडल

Sun, 28 Aug 2016 10:59 PM IST
चित्रकूट
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समोसा बनाते छोटेलाल। - फोटो : अमर उजाला
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रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु और साक्षी मलिक के पदक जीतने पर पूरा देश इतरा रहा है। उनके सम्मान और रुपयों की हो रही बारिश से अन्य खिलाड़ी भी खुश हैं, लेकिन प्रदेश स्तर पर खेल चुके कुछ खिलाड़ियों को कसक भी है।इनका कहना है कि बेहतर सुविधाएं मिलीं होती तो हम भी मेडल जीतते। मुफलिसी में जी रहे ये खिलाड़ी आज चाय और पान बेचकर परिवार पाल रहे हैं।
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जिले में होनहार खिलाड़ियों की कमी नहीं रही। प्रतिभा के धनी एथलीट सुरेश कुमार और छोटेलाल को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाई। इस कारण ये अपनी प्रतिभा प्रदेश के बाहर नहीं दिखा पाए। कर्वी के जगदीश गंज निवासी एथलीट सुरेश गुप्ता पुत्र मंजू प्रसाद गुप्ता बचपन से ही प्रतिभाशाली थे।

पिता ने उसका नाम 1978 मेें फतेहगंज से कटवाकर कर्वी के जनसेवा इंटर कालेज में लिखाया। इन्हें फर्राटा दौड़ के साथ ही 400 और 800 मीटर की बाधा दौड़ में महारत हासिल थी। सुरेश ने 1980, 81 और 82 में सीतापुर  लखनऊ और बनारस  में आयोजित प्रदेश स्तरीय खेलों में शीर्ष तीन में जगह बनाई,
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लेकिन गरीबी और पर्याप्त सुविधा न मिलने से उनकी प्रतिभा आगे नहीं बढ़ पाई। नौकरी नहीं मिली तो कचहरी-कोतवाली परिसर के बीच पान की दुकान खोल ली। पान की दुकान से ही परिवार का भरण पोषण करते हैं।


कुछ ऐसी ही कहानी छोटे लाल की भी है। एक समय ऐसा था जब चित्रकूट इंटर कालेज में जिला और प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता होने पर सैकड़ों लोग छोटेलाल की दौड़ देखने के लिए आते थे। 800, 1500 और 3000 मीटर की दौड़ में माहिर इस खिलाड़ी ने 1994, 1996 और 1999 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में चित्रकूटधाम मंडल का नेतृत्व किया।

कुछ समय तक इनकी खूब वाहवाही हुई, लेकिन उसके बाद अधिकारियों ने इन्हें भुला दिया। उपेक्षा के कारण इस होनहार खिलाड़ी का भविष्य चौपट हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से पढ़ाई भी बंद हो गई। आज जिला अस्पताल के सामने चाय और समोसा बेचकर परिवार पाल रहे हैं।
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