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Chitrakoot News: यमुना और छोटी नदियों का जलस्तर घटा, दुश्वारियां जस की तस

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पानी भरे रपटे से होकर जाती गर्भवती।  - फोटो : संवाद
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मऊ-राजापुर। यमुना सहित छोटी नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा लेकिन यमुना तट के गांवों के रास्ते पर बाढ़ का पानी भरने से 10 गांवों के लोग परेशान हैं। हालांकि यहां के ग्रामीणों की सुविधा के लिए नावें चलाई जा रही हैं।
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रविवार की सुबह से ही पानी का जलस्तर कम होने लगा है। हालांकि मऊ क्षेत्र के मवई कला गांव के पास यमुना और कौशकी नदी का पानी सड़क के रपटे पर भरा है। समाजसेवी इंद्रेश त्रिपाठी, अंजनी त्रिपाठी, पंकज सिंह, अरुण, विजय बहादुर निषाद ने बताया कि रास्तों में पानी भरा होने से समस्या हो रही है।
राजापुर क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर कम हो गया है। चिल्लीमल, भदेदू, सुरवल, अर्की, बरुवा के शिवपुर आदि गांवों की बस्ती में अभी भी पानी भरा है। बरूवा और शिवपुर के रास्ते पर जलभराव से समस्या हो रही है। रविवार को यमुना नदी का जलस्तर 87.83 पर आ गया। खतरे का निशान 95.5 है।
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इनसेट
फोटो न- 9- पीड़ितों से बातचीत करते कांग्रेसी।

पीड़ितों से मिलीं कांग्रेसी नेता
चित्रकूट। बारिश से कई लोगों के कच्चे घर गिर गए थे। मजबूरी में पन्नी तानकर रह रहे हैं। मानिकपुर क्षेत्र के ऊंचाडीह के परौंहा पुरवा की अनार कली, पयासी पुरवा में तुलसी, राधेश्याम, मऊ गुर्दरी में मनोज अरविंद, लखन, राधिका, सूरज भान, नथिया, राजकली के मकान बारिश से गिर गए हैं। रविवार को कांग्रेसी नेता रंजना बराती लाल पांडेय पीड़ित ग्रामीणों से मिलीं। पीड़ितों को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की।

फोटो नंबर-11- बरदहा नदी के रपटे पर पानी से होकर परिजनों के साथ आती गर्भवती महिला।
मानिकपुर। पाठा क्षेत्र के चमरौहा और सकरौंहा के लोगों को बरदहा नदी का रपटा पार कर मानिकपुर और शहर आना पड़ता है। शनिवार की शाम चमरौंहा गांव की गर्भवती सुनीता को दर्द हुआ तो परिजन उन्हें लेकर नदी किनारे पहुंचे। परिजनों की मदद से पैदल रपटे से नदी पार कर की। इसके बाद वाहन से अस्पताल पहुंचीं। तमाम ग्रामीण भी इसी रपटे से पानी के बीच आ-जा रहे हैं। विकास कुमार, मार्टिन व रामलाल ने बताया कि बरदहा नदी की ओर पुल नहीं बना है। हर साल बारिश में यही हाल होता है। साल भर इसी तरह ग्रामीण गुजरते हैं। बरदहा के दूसरे छोर पर कल्याणपुर की ओर पुल बना है। हाल ही में उसका संपर्क मार्ग टूट गया। अब ग्रामीण छह किमी चक्कर काटकर जाते हैं। शार्टकट के लिए इसी रास्ते से आते-जाते हैं।
इनसेट
फोटो नंबर-5- रामघाट
बाढ़ से रामघाट की लाइटें खराब, करीब पांच करोड़ का नुकसान
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से रामघाट पर पर्यटन विकास के लिए लगीं लाइटें खराब हो गईं। इससे पर्यटन विभाग को करोड़ों रुपये की चपत लग गई है। बुंदेली सेना जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि रामघाट पर बाढ़ हर साल आती है। किसी साल कम तो किसी साल ज्यादा। पर्यटन विभाग को भी इसकी जानकारी है। आरोप लगाया कि इसके बाद भी सजावटी और कमजोर लाइटें लगाई गईं। जो बाढ़ से खराब हो गई हैं। इससे पर्यटन विभाग का पांच करोड़ से अधिक का नुकसान हो गया है। जिलाध्यक्ष ने रामघाट के बाढ़ पीड़ित दुकानदारों को मुआवजा देने की भी मांग की।
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