कसबे में पीने के पानी के लिए मारामारी की स्थिति है। ऊंचाई वाले स्थानों में नलों में पानी नहीं आता और हैंडपंपों में भी ज्यादातर गंदा पानी देते हैं।
गर्मी बढ़ते ही कसबे में हर साल की तरह पेयजल संकट गहरा गया है। लोग सुबह होते ही पानी के जुगाड़ में लग जाते हैं। टंकी से जलापूर्ति भी भगवान भरोसे है। बमुश्किल पंद्रह मिनट तक किसी तरह नलों से पानी टपकता है, जो ऊंचाई वाले मोहल्लों तक भी नहीं जाता। ऐसे में लोग हैंडपंपों पर आश्रित हैं।
राममिलन, रामबाबू, अमित, रामजस आदि ने बताया कि यहां पर आठ ट्यूबवेल हैं पर इनकी आपूर्ति से मानिकपुर के लोगों को लाभ मिल रहा है। दिलीप, संजय, रामदत्त, संदीप आदि ने बताया कि लगभग दस हैंडपंप हैं, जिनमें ज्यादातर से गंदा पानी आता है। तीन हैंडपंप ऐसे हैं जिनसे कुछ ठीकठाक पानी आता है और ऐसे में इन हैंडपंपों में लंबी लाइन लगती है। कई बार तो विवाद की स्थिति भी बन जाती है।