चित्रकूट। जिला अस्पताल और विकास भवन में लगे वाटर कूलर खराब हैं। इससे मरीज, तीमारदार और फरियादी भीषण गर्मी में पानी की बोतलें खरीदकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारी फ्रीजरों को ठीक नहीं करा रहे हैं। तीमारदारों और फरियादियों के मुताबिक, रोज करीब 200 पानी की बोतले दुकानदार बेचते हैं। आरोप है कि पानी बेचने वाले दुकानदारों की सेटिंग विकास भवन और अस्पताल के कर्मचारियों से है, जिन्हें बोतलों की बिक्री पर कमीशन दिया जाता है।
जिला अस्पताल में लगे एक फ्रीजर के भरोसे रोज करीब तीन हजार लोग रहते हैं। फ्रीजर से तीन घंटे बाद गर्म पानी आने लगता है। इससे प्यास नहीं बुझती है। वर्ष 2024 में अस्पताल में तीन फ्रीजर लगे थे। इनमें से दो खराब हो गए हैं। इन फ्रीजरों को अभी तक नहीं बनवाया गया है।
रोहित सिंह ने बताया कि गर्मी में भी जिला अस्पताल में ठंडा पानी नसीब नहीं होता है। प्यास बुझाने के लिए पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। मरीज नत्थू प्रसाद का कहना है कि फ्रीजर से पानी भरने गए तो गर्म पानी आ रहा था। मजबूरी में दुकान से पानी खरीद कर पीना पड़ा। विकास चंद्र ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कुछ कर्मचारी दुकानों से कमीशन के नाम पर फ्री में पानी लेते हैं।
खराब फ्रीजरों को बनवाने के लिए मिस्त्री को बुलाया गया है। आरओ को पाइप लाइन से कनेक्शन के लिए कहा गया है। दुकानों से किसी कर्मचारी का कमीशन होने की बात उनके सामने नहीं आई है।- डाॅ. शैलेंद्र कुमार, सीएमएस
विकास भवन में लगे फ्रीजर खराब, कैसे बुझे फरियादियों की प्यास
विकास भवन में सीडीओ समेत 20 से अधिक जिला स्तरीय अफसरों के कार्यालय हैं। प्रतिदिन करीब चार से पांच सौ लोग फरियाद लेकर आते हैं। यहां फरियादियों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं है। विकास भवन में लगे तीन फ्रीजर काफी दिनों से खराब हैं। फरियादी वृद्ध छंगूलाल ने बताया कि बंद पेंशन चालू कराने के लिए आए थे। प्यास लगी तो फ्रीजर के पास गए, लेकिन फ्रीजर बंद मिला। जानकी सिंह ने बताया कि विकास भवन में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। मुख्य विकास अधिकारी अमृत पाल कौर के मुताबिक, फ्रीजर को ठीक कराने के लिए मिस्त्री बुलाए गए हैं। संवाद