चित्रकूट। वक्फ संपत्तियों का ब्योरा ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। अभी तक मात्र 14 संपत्तियों का ब्योरा उम्मीद पोर्टल पर अपलोड किया जा सका है, जबकि 108 ने रजिस्ट्रेशन कराया है। ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए विभाग ने दो नोडल को भी नियुक्त किया है। संसाधन पूरे होने के बाद भी अभी तक वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कोई निर्धारित डाटा नहीं है। गजट व राजस्व सर्वे में भी बड़ा अंतर आ रहा है। इससे विभाग भी असमंजस में है।
वक्फ बोर्ड में यहां केवल सुन्नी समुदाय की ही संपत्तियां हैं। उम्मीद पोर्टल पर अभी तक कुल 122 संपत्तियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा सका है। इनमें केवल 14 संपत्तियों का ब्योरा पूरी तरह से अपलोड हो सका है। वहीं, 108 संपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से कितनी संपत्तियां अपलोड होनी हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है। संपत्तियों का ब्योरा अपलोड कराने के लिए बोर्ड ने दो कोऑर्डिनेटर भी नामित किए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अब तो विभाग भी परेशान है कि कैसे संपत्तियों का ब्योरा अपलोड हो सकेगा।
गजट व राजस्व परिषद के सर्वे में ब्योरा अलग-अलग
10 मई 1986 के गजट के अनुसार सदर तहसील में 45, मऊ में 66, मानिकपुर में 16 व राजापुर में 33 संपत्तियां हैं। वहीं गजट वाली कुछ संपत्तियां भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं, इसमें सदर तहसील में 15, मऊ में चार, मानिकपुर में तीन हैं। गजट में दर्ज कुछ संपत्तियां राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं, इसमें सदर में 30, मऊ में 54, मानिकपुर में 15 व राजापुर में 32 संपत्तियां हैं। राजस्व परिषद के सर्वे में सदर तहसील में 89, मऊ में 117, मानिकपुर में 16 व राजापुर में 33 संपत्तियां हैं। वहीं राजस्व परिषद में दर्ज कुछ संपत्तियां गजट में दर्ज नहीं हैं, इसमें सबसे बड़ा अंतर सदर का मऊ तहसील में है, सदर में 44, मऊ में 59 संपत्तियां हैं। अब विभाग खुद असमंजस में है कि कौन सा ब्योरा सही है। कौन पोर्टल पर अपलोड होगा।
किसकी कितनी हैं संपत्तियां
वक्फ बोर्ड के मदरसा की सात, मस्जिद की 22, कब्रिस्तान की 188, मजार व दरगाह की नौ, ईदगाह की पांच, इमामबाड़ा की नौ, करबला की चार व तकिया की एक संपत्ति दर्ज हैं। जो सुन्नी समुदाय के पास है।
वर्जन
गजट व राजस्व परिषद के सर्वे में संपत्तियों में अंतर होने की वजह से ब्योरा को पोर्टल पर अपलोड कराने में भी समस्या आ रही है। नामित कोआर्डिनेटर लगातार संपत्तियों का ब्योरा अपलोड कराने में जुटे हुए हैं। अभी तक मात्र 14 संपत्तियों का ही ब्योरा अपलोड हो सका है।-महेंद्र प्रताप नाथ, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी