चित्रकूट। पॉक्सो अधिनियम न्यायालय की विशेष न्यायाधीश रेनू मिश्रा ने शांति भंग के इरादे से अपमानित करने के मामले में आरोपी बिलाल और नियामत को दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 की धारा चार का लाभ देते हुए एक वर्ष की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया है।
यह मामला कर्वी कोतवाली नगर थाना क्षेत्र का है, जहां 22 सितंबर 2018 को परिवादिनी ने बिलाल और नियामत पर जातिसूचक गालियां देने और नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इन पर पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गई थीं। इस मामले की सुनवाई में अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। बयान और साक्ष्य के आधार पर अदालत ने प्रत्येक आरोपी को 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि की एक-एक प्रतिभूति जिला प्रोबेशन अधिकारी, चित्रकूट के समक्ष दो सप्ताह में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437ए के प्रावधानों के तहत, उन्हें 50 हजार रुपये का निजी बंधपत्र और एक सप्ताह के भीतर इतनी ही राशि की जमानत दाखिल करनी होगी।
गैर इरादतन हत्या के प्रयास में अग्रिम जमानत
चित्रकूट। गैर इरादतन हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी राजू खान और गुड़िया को सत्र न्यायाधीश शेष मणि ने अग्रिम जमानत दी। यह जमानत 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि की जमानत पर मिली है।
मामला बरगढ़ थाना क्षेत्र का है। न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज हुई। मकसूद अली ने राजू खान व गुड़िया पर मारपीट, चोरी व धमकी का आरोप लगाया। राजू पर भुगतान न करने पर मारपीट व चाकू से चोट पहुंचाने का आरोप था। न्यायालय ने पाया कि शिकायतकर्ता ने डॉक्टरी परीक्षण से इन्कार किया था। आरोपियों का आपराधिक इतिहास नहीं था। सात वर्ष की सजा वाले अपराधों को देखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत स्वीकार कर ली। (संवाद)
पॉक्सो अधिनियम में आरोपी को जमानत
चित्रकूट। पॉक्सो अधिनियम के मामले में आरोपी राजू को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट रेनू मिश्रा ने जमानत दे दी है। यह राजू की दूसरी जमानत याचिका थी, जो पीड़िता के बयान बदलने के बाद मंजूर हुई। अदालत ने राजू को एक लाख रुपये के मुचलके पर रिहा किया। मऊ थाना क्षेत्र में आरोपी राजू पर 14 वर्षीय किशोरी को ले जाने और दुष्कर्म का आरोप था। इस मामले में अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जमानत अर्जी डाली गई थी। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में कहा कि वह अपनी मर्जी से गई थी और राजू ने शारीरिक शोषण नहीं किया। उसने पुलिस को दिए बयान माता-पिता के दबाव में बताए। राजू के अधिवक्ता ने पीड़िता की जन्मतिथि में विरोधाभास और राजू के आपराधिक इतिहास न होने का तर्क दिया। शिकायतकर्ता ने आपत्ति दर्ज नहीं की, जिसके बाद अदालत ने राजू को जमानत दी। (संवाद)
दहेज उत्पीड़न में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट खारिज
चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला ने दहेज उत्पीड़न और मारपीट के मामले में पुलिस द्वारा लगाई गई अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता राज नारायण की विरोध याचिका को स्वीकार कर मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
राज नारायण ने अपनी पुत्री मनीषा देवी की शादी 2021 में बलवीर से की थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज की मांग को लेकर मनीषा को प्रताड़ित कर रहा था। बीते 27 दिसंबर, 2023 को बलवीर ने मनीषा को मारपीट कर घर से निकाल दिया और 50 हजार रुपये व गाड़ी की मांग की। शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इस पर शिकायतकर्ता राज नारायण ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई में अदालत ने पाया कि पुलिस की अंतिम रिपोर्ट महिला थाने में हुए एक समझौते पर आधारित थी, जबकि दहेज उत्पीड़न के गंभीर आरोप थे। समझौते के बाद भी मनीषा को (गर्भवती होने के बावजूद) दोबारा घर से निकाल दिया गया था। इस मामले में अगली सुनवाई 20 जून, को होगी।(संवाद)