चित्रकूट। कोषागार (ट्रेजरी) घोटाले ने प्रदेश में वित्तीय अनुशासन की जड़ें हिला दी हैं। चित्रकूट में पेंशन भुगतान के दौरान नॉन बजटरी फंड की फर्जी एंट्री से करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। जांच में जुटे अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक जिले की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसे ही गड़बड़झाले अन्य जिलों में भी हो सकते हैं। शासन जल्द ही सभी कोषागारों में विशेष जांच करा सकती है।
कोषागार में दो तरह के भुगतान होते हैं, बजटरी और नॉन बजटरी। बजटरी भुगतान में स्पष्ट होता है कि किस मद से कितना भुगतान हुआ, लेकिन नॉन बजटरी फंड विशेषकर पेंशन मामलों में यह नियंत्रण नहीं होता। यहां भुगतान पुराने अभिलेखों के आधार पर दर्ज होता है। चेक रजिस्टर में यदि एक बार इंट्री गलत हो जाए और उसका अगली माह मिलान न किया जाए तो वही राशि मूल भुगतान के रूप में स्थाई हो जाती है। इसी गड़बड़ी का फायदा उठाकर कुछ कर्मचारियों ने वर्षों तक फर्जी भुगतान दिखाया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, चित्रकूट कोषागार में 43.13 करोड़ रुपये तक की रकम संदिग्ध भुगतान के दायरे में आई है। रिकॉर्ड के मिलान में 2018 से सितंबर 2025 के बीच अधिकांश महीनों की प्रविष्टियां मेल नहीं खा रहीं है।
सेवानिवृत्त वरिष्ठ कोषाधिकारी अवधेश यादव के अनुसार, नॉन बजटरी भुगतान की प्रक्रिया भरोसे पर चलती है। इसमें एंट्री का कोई डिजिटल लॉक नहीं है। अगर कर्मचारी या पटल सहायक नीयत बदल ले तो रजिस्टर एंट्री में ही फर्जीवाड़ा संभव है। चित्रकूट जैसा घोटाला प्रदेश के अन्य जिलों में भी हो सकता है, क्योंकि यही प्रणाली हर जगह लागू है।
घोटाले के खुलासे के बाद शासन ने जांच के लिए एडीएम (न्यायिक) अरुण कुमार की अध्यक्षता में समिति गठित की है। समिति को निर्देश है कि 2018 से अब तक के सभी नॉन बजटरी भुगतान की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट दी जाए। अरुण कुमार ने बताया कि अब तक की जांच में कई प्रविष्टियां संदिग्ध मिली हैं। यदि जरूरत हुई तो हम 2018 के पहले के रिकॉर्ड भी खंगालेंगे।
ऑडिट टीम की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस घोटाले ने लेखा परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एजी ऑफिस की टीम वर्ष 2018 से अब तक सात बार कोषागार का ऑडिट करने आई, लेकिन बिना अभिलेखों की जांच किए ही लौट गई। आरोप है कि पटल सहायकों ने दस्तावेज नहीं दिए और ऑडिट टीम ने इसे रिपोर्ट में दर्ज भी नहीं किया। हाल ही में आई स्पेशल ऑडिट टीम ने जब अभिलेखों की एंट्री लाइन-बाय-लाइन जांची, तभी फर्जी प्रविष्टियों और गायब राशि का खुलासा हुआ।
प्रदेशव्यापी जांच की तैयारी
वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक, शासन अब सभी जिलों के कोषागारों से नॉन बजटरी भुगतान का डाटा तलब कर सकता है। राज्य में करीब 75 कोषागार और 35 उप-कोषागार हैं, जहां यह प्रणाली लागू है। यदि जांच में चित्रकूट जैसा पैटर्न सामने आया तो यह मामला सैकड़ों करोड़ रुपये के संभावित वित्तीय घोटाले में बदल सकता है।