चित्रकूट। कोषागार घोटाले में जहां लाखों रुपये के गबन ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है, वहीं पुलिस की भूमिका ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुलिस ने न सिर्फ एफआईआर दर्ज करने में नियमों की अनदेखी की, बल्कि आरोपियों को तीन दिन तक कोतवाली में रखने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं दिखाई। शुक्रवार शाम तक मुख्य आरोपियों समेत करीब 20 लोगों को कोतवाली में बैठाने के बाद भी एक की भी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं की गई।
स्थिति तब गंभीर हो गई जब शनिवार शाम करीब पांच बजे मुख्य आरोपी संदीप श्रीवास्तव की तबीयत कोतवाली में बिगड़ गई। बीपी बढ़ने और बेचैनी की शिकायत पर पुलिस उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंची। अस्पताल में भर्ती कराने के बजाय पुलिस ने उसके भाई से दाखिला प्रक्रिया पूरी कराई। हालत अधिक गंभीर होने पर एएसपी सतपाल सिंह, सीएमओ और सीएमएस की मौजूदगी में उसे मेडिकल कॉलेज प्रयागराज रेफर किया गया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने गुरुवार देर रात करीब तीन बजे कोषागार घोटाले के आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन न तो इसे यूपी कॉप एप पर अपलोड किया गया और न ही सार्वजनिक किया गया। इस मामले में एसपी ने केवल एक वीडियो बयान जारी किया।
शुक्रवार सुबह पुलिस ने मुख्य आरोपी अवधेश प्रताप सिंह, विकास सिंह सचान और अशोक वर्मा को उनके घरों से हिरासत में लिया था। देर रात मुख्य आरोपी संदीप श्रीवास्तव को भी कोतवाली लाया गया, लेकिन किसी भी आरोपी की एंट्री अभिलेखों में दर्ज नहीं की गई।
सीओ अरविंद वर्मा ने बताया कि ट्रेजरी विभाग के चारों नामजद आरोपियों समेत करीब 20 लोगों से पूछताछ की जा रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।