चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला ने दस वर्ष पुराने छेड़छाड़, मारपीट और जान से मारने की धमकी के मामले में तीन आरोपियों को दोषमुक्त किया है। यह फैसला राजापुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक प्रकरण में सुनाया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय न होने के कारण आरोपियों को बरी किया गया। दोनों गवाह बयान से मुकर गए।
शिकायतकर्ता कल्ला ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी थी। 25 मार्च 2016 की रात लवकुश ने उनकी पत्नी कलावती से छेड़छाड़ की थी। विरोध करने पर लवकुश, संतोष और गुलामी ने कल्ला को पीटा, जिससे उनके दाहिने कान का पर्दा फट गया। पुलिस ने पहले प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी, जिसके बाद आयोग के आदेश पर 17 अप्रैल 2017 को राजापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और 23 फरवरी 2024 को आरोप तय किए गए।
अभियोजन पक्ष ने रोशन लाल और लक्ष्मी प्रसाद को गवाह के तौर पर पेश किया। हालांकि, दोनों अपने बयानों से मुकर गए और घटना की जानकारी होने से इन्कार किया। कथित पीड़िता कलावती और शिकायतकर्ता कल्ला भी गवाही के लिए न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हुए। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन के साक्ष्य ठोस नहीं थे।