कुछ दिन पहले तक कांग्रेस की नीतियों का गुणगान करने
वाले पूर्व पदाधिकारी को सत्ताधारी पार्टी भाने लगी है। उनको सपा कार्यालय
में देखकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
पिछले दिनों कांग्रेस
जिलाध्यक्ष से मनमुटाव और फिर उनके खिलाफ आंदोलन के बाद आलाकमान से तवज्जो न
मिलने से माना जा रहा है कि ये जल्द ही सपाई चोले में नजर आएंगे।
कांग्रेस
के पूर्व जिला महासचिव सुनील पांडे गुरुवार को समाजवादी पार्टी के
कार्यालय में दिखे। मौका था कुछ लोगों के पार्टी में शामिल होने का।
जिलाध्यक्ष भइयालाल यादव और कुछ युवा पदाधिकारियों के साथ इनकी गुफ्तगू भी
हुई। घुल मिलकर बातें करने से कई संकेत मिल रहे थे।
गौरतलब है कि
सुनील पांडे की जिला कांग्रेस में युवा नेता के रूप में पहचान है। इनका
मामला तब से गड़बड़ाया, जब कांग्रेस जिलाध्यक्ष के रूप में रामभवन गुप्ता
पौहरिया की ताजपोशी हुई।
कांग्रेस के अंदरखाने की मानें तो मनमुटाव
पद को लेकर हुआ। सुनील जो पद चाहते थे, उस पद के लिए जिलाध्यक्ष के मन में
और कोई नाम था। वे सुनील की कुछ शिकायतों की वजह से यह पद उनको नहीं देना
चाहते थे।
सुनील को जब पद नहीं मिला तो उन्होंने बागी तेवर अपना
लिए। जिलाध्यक्ष पर दबाव बनाने को पार्टी कार्यालय पर प्रदर्शन किया, पुतला
भी फूंका पर रामभवन नहीं पसीजे। जिलाध्यक्ष ने अनुशासन समिति की संस्तुति
पर इनको पार्टी से निकाल दिया।
हालांकि तब सुनील ने कहा था कि वे
पूरी जानकारी आलाकमान को दे रहे हैं और वे आजीवन कांग्रेसी ही रहना चाहते
हैं। अब समाजवादी पार्टी कार्यालय में उनके नजर आने से तरह-तरह के कयास
लगने लगे हैं।
सपा जिलाध्यक्ष भइयालाल यादव ने बताया कि सुनील पांडे
ने उनसे पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई है। सुनील जब महामति
प्राणनाथ महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष थे, तब वे सपा में शामिल हुए थे।
इसके बाद उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली। अब उनकी इच्छा प्रदेश आलाकमान को
बता दी जाएगी।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामभवन गुप्ता ने कहा कि हमने
पहले ही सुनील को निष्कासित कर दिया है। अब वे कहीं भी जाएं, हमसे मतलब
नहीं। उनके जाने से पार्टी का कोई नुकसान होगा। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य
में अगर कोई भूला भटका आना चाहे तो स्वागत है।