चित्रकूट। शहर के ऐतिहासिक मराठा कालीन कोठी तालाब की सुंदरता और सुरक्षा के लिए बनाई जा रही दीवार के गिरने के बाद अब शेष दीवार को भी गिराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि लगातार हुई बारिश से दीवार में दरारें आ गई थीं, इसलिए सुरक्षा कारणों से इसे पूरी तरह हटाकर नई तकनीक से दोबारा बनाया जाएगा।
रविवार को अमर उजाला में कोठी तालाब की सुंदरता के लिए बन रही दीवार गिरी शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। दोपहर में जिला पर्यटन अधिकारी और कार्यदाई संस्था के इंजीनियरों की टीम ने मौके का निरीक्षण कर बची हुई दीवार को भी गिराने का निर्णय लिया। इंजीनियरों का कहना है कि दीवार की संरचना कमजोर हो गई है, इसलिए इसे नए सिरे से मजबूती के साथ पुनर्निर्मित किया जाएगा।
सिंधु समाज के जिलाध्यक्ष राजीव लखानी ने कहा कि विभाग ने पहले से ही निर्माण में सही तकनीक और मानकों का पालन नहीं किया था। अधिक बारिश एक कारण हो सकती है, लेकिन कार्य की गुणवत्ता में भी कमी रही है। अब पूरी दीवार को हटाकर नया निर्माण किया जाना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आर.के. रावत ने बताया कि तीन दिन पहले ही दीवार को गिराने का निर्णय लिया गया था। इसे फिर से बनवाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह तय नहीं हुआ है कि निर्माण पुराने बजट से होगा या नए से, लेकिन कार्यदाई संस्था को पुनर्निर्माण के निर्देश दे दिए गए हैं।