शिवरामपुर, पहाड़ी और भरतकूप क्षेत्र में पेयजल का संकट गहराता ही जा रहा है। इन क्षेत्रों के करीब एक दर्जन गांव के लोग तो पानी के लिए एक किमी तक की दौड़ लगा रहे हैं। कस्बों में एक बाल्टी पानी के लिए तेज धूप के बीच लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। कई बार विवाद की भी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कुछ गांव में कुओं का तो सहारा है लेकिन हैंडपंप रिबोर की स्थिति में हैं।
शिवरामपुर के जाकिर हुसैन, अमित गुप्ता, प्रदीप कुमार, संजय, देव यादव, रितिक और राकेश आदि ने बताया कि बस्ती से एक किमी दूर जलनिगम की पानी की टंकी है। जिससे आपूर्ति तो होती है, लेकिन महज आधे घंटे ही रुक-रुककर जलापूर्ति होती है। महिलाओं और बच्चों को दिन भर घर से दूर लगे हैंडपंपों से पानी ढोना पड़ता है।
पहाड़ी ब्लाक के रामपुर, बिसौंधा, धुनुवा, इंटवा, बेलरी, बराछी और कौबरा में भी पेयजल संकट गंभीर होने लगा है। इन गांव के लोगों को पहले कुओं से भी पानी मिलता था लेकिन इस साल बारिश न होने और जलस्तर गिरने से कुएं भी जवाब दे गए हैं। स्थानीय निवासी शशि कुमार शुक्ल, रामगोपाल, संतोष कुमार, अतुल पांडेय और तेजप्रताप ने बताया कि इन गांवों में लगभग 150 हैंडपंप हैं लेकिन आधे से ज्यादा रिबोर मांग रहे हैं।
भरतकूप क्षेत्र के भारतपुर, गोंडा, धौरही और अकबरपुर का भी कुछ ऐसा ही हाल है। प्रधानपति कल्लू पटेल, राजकरण, प्रधान शिवचरण यादव और गैबीशरण ने बताया कि क्षेत्र में पेयजल संकट गर्मी के दिनों में और बढ़ेगा। खराब हैंडपंपों के कारण ग्रामीण एक किमी दूर दूसरे पुरवा से पानी लाने को मजबूर हैं।