मंदाकिनी में डुबकी लगाने को रामघाट में जुटे श्रद्धालु
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चैत्र माह की अमावस्या पर होने वाले मंदाकिनी स्नान पर भी सूखे का असर दिखा। हर वर्ष मंदाकिनी के घाटों पर जुटने वाली श्रद्धालु की पांच से छह लाख की भीड़ इस बार आधे पर ही सिमट गई। श्रद्धालुओं की संख्या घटने के पीछे किसान वर्ग की कमजोर आर्थिक स्थिति सबसे ज्यादा जिम्मेदारी बताई जा रही है।
इसके अलावा कई किसान फसल की रखवाली में व्यस्त होने के कारण मंदाकिनी स्नान करने नहीं पहुंच सके। लेकिन इन सबके बाद भी करीब तीन लाख लोगों ने मंदाकिनी में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। किसानों ने खरीफ की फसल बेहतर होने की कामना भगवान कामतानाथ से की। मत्गयेंद्रनाथ स्वामी का जलाभिषेक कर श्रद्धालुओं ने मनौती मानी।
कुछ दिनों पूर्व कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी मोनिका रानी की अध्यक्षता में अमावस्या पर मंदाकिनी स्नान की तैयारियों को लेकर बैठक हुई थी। जिसमें जिले के विभिन्न घाटों पर पांच से छह लाख श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान व्यक्त किया गया था।
इतनी संख्या को देखते हुए तैयारियां भी की गईं। लेकिन इस बार अमावस्या पर श्रद्धालुओं की कम संख्या नजर आई। बुधवार की रात से ही ट्रेन व बसों से श्रद्धालु धर्मनगरी में डेरा जमाए थे। गुरुवार को सूर्योदय के पूर्व ही लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाकर मत्यगयेंद्रनाथ स्वामी का जलाभिषेक किया। इसके बाद कामदगिरी की परिक्रमा लगाई। भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवनदास ने बताया कि इस बार करीब तीन लाख श्रद्धालुओं ने ही मंदाकिनी में डुबकी लगाई। ो