जिले में मनरेगा की हालत यह है कि कागजों में 116 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत ढाई हजार से अधिक मजदूर काम तो कर रहे है, लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष की एक करोड़ दस लाख रुपये मजदूरी बकाया है। मनरेगा खाते में शासन से कोई धन नहीं मिला है। अभी भी सारे काम उधारी पर हो रहे हैं।
मनरेगा की हालत किसी से छिपी नहीं है। बडे़-बडे़ दावे करने वाले मंत्रियों और अधिकारियों की बातों से लगता है कि मनरेगा में कार्यरत मजदूरों की आर्थिक स्थिति अच्छी होगी, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। वर्ष 2016-17 में मनरेगा के अंतर्गत जिले में 2014 कार्य कराए गए, जिसमें सिर्फ 727 कार्य ही पूरे हो पाए। इस प्रकार 1377 कार्य लंबित हैं।
मनरेगा सेल के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2012-13 से लेकर अबतक जिले में मनरेगा के 34 हजार 242 कार्यों में 29 हजार 520 कार्य ही पूरे हो पाए है। इसमें 4722 कार्य अधूरे हैं। खेत समतलीकरण,मेड़बंदी, संपर्क मार्ग, वृक्षारोपण और श्रम परक कार्यो में सदर ब्लाक में 982,मानिकपुर 935, मऊ में 1052, पहाड़ी में 1040 और रामनगर में 713 कार्य अधूरे पडे़ हैं।
मनरेगा उपायुक्त विनय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिले की 335 ग्राम पंचायतों में 116 में मनरेगा कार्य चल रहे हैं। जिसमें 2892 मजदूर कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शासन से धनराशि न मिलने के कारण पिछले वित्तीय वर्ष की एक करोड़ दस लाख रुपये मजदूरी बकाया है।