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बागी हुए पूर्व विधायक ने कमल छोड़ हैंडपंप पकड़ा

Tue, 31 Jan 2017 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो राजापुर (चित्रकूट)।
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राजनी‌ति - फोटो : demo pic
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चित्रकूट। पहले भाजपा से ब्लाक प्रमुख, फिर बसपा से सदर विधायक बनने वाले दिनेश मिश्र 2017 में बड़ी उम्मीद के साथ दोबारा कमल के पाले में आए थे। लेकिन टिकट न मिलने से अब वह हैंडपंप के साथ खड़े हो गए हैं। जिले के हनुवा गांव में जन्मे पूर्व विधायक को राष्ट्रीय लोकदल का मानिकपुर विधानसभा 237 का प्रत्याशी बनाया गया है। पूर्व विधायक भाजपा सांसद भैरों प्रसाद मिश्र के सगे छोटे भाई हैं।
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    20 साल से जिले में राजनीति कर रहे दिनेश मिश्र 2002 में भाजपा से मानिकपुर के ब्लाक प्रमुख बने। फिर भाजपा छोड़कर सन 2007 में बहुजन समाज पार्टी से चित्रकूट विधानसभा 236 से विधायक बने। 2016 में लखनऊ में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा ने आश्वासन दिया था कि उनको टिकट दिया जाएगा। इससे वह भाजपा में शामिल हो गए थे। लेकिन न तो उन्हें टिकट दिया गया और न ही पार्टी के किसी कार्यकर्ता को। जिसने भाजपा का हमेशा विरोध किया है, उसका मानिकपुर विधान सभा से टिकट कर दिया गया। इसके विरोध में वह चुनाव लड़ने के लिए राष्ट्रीय लोकदल पार्टी में शामिल हो गए। कहा, क्षेत्रीय भावनाओं व दस्यु समस्या को देखते हुए वह इस पार्टी से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने डकैतों को संरक्षण दिया, अब भाजपा उन्हीं को टिकट दे रही है। उन्होंने सदैव डकैतों के खिलाफ राजनीति की है।

पूर्व विधायक के मैदान में आने से बदला समीकरण
चित्रकूट। पूर्व विधायक दिनेश मिश्र के मानिकपुर विधानसभा सीट से मैदान में आने से समीकरण बदल गया है। इस सीट पर स्वजातीय मतदाताओं की संख्या अधिक होने से यदि यह मतदाता पूर्व विधायक की ओर खिसके तो अन्य दलों के प्रत्याशियों के मतोें में सेंध लग सकती है। मानिकपुर विधान सभा में इस बार सपा व कांग्रेस क ा गठबंधन होने से सपा ने अपना प्रत्याशी घोषित ही नहीं किया है। कांग्रेस ने संपत पाल को, भाजपा ने आर.के सिंह पटेल व बसपा ने चंद्रभान पटेल को मैदान में उतारा है। जातीय समीकरण में फंसी इस सीट से अभी तक कोई बडे़ दल ने ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं उतरा था। अचानक पूर्व विधायक दिनेश मिश्र के मैदान में उतरने से फिर से समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि भाजपा, कांग्रेस और बसपा के दावेदारों के अनुसार इससे उनकी सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पडे़गा। सभी दलों ने अपनी जीत का दावा किया है।
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