चित्रकूट। आजादी के बाद से अब तक 18 लोकसभा चुनावों में बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट से पांच-पांच बार कांग्रेस और भाजपा, दो-दो बार बसपा-भाकपा, तीन बार सपा और एक बार जनता दल का सांसद चुना गया। जनता ने प्रतिनिधि चुनने में सभी दलों को मौका दिया है, लेकिन विकास के मामले में बांदा और चित्रकूट दोनों ही जिलों को निराशा मिली है। किसी भी सांसद के नाम कोई उल्लेखनीय योगदान नहीं है।
आजादी के बाद हुए तीन चुनावों, 1952, 1957, 1962 में बांदा संसदीय सीट पर कांग्रेस पार्टी से सांसद चुने गए। इनमें से पहले दो, दूसरे जिले के रहने वाले थे। इसके बाद तीन चुनावों में कांग्रेस को जीत नहीं मिली। साल 1967 में भाकपा, 1971 में जनसंघ और 1977 में जनता ने जनता पार्टी का सांसद चुन लिया। वहीं, साल 1980 और 1984 में फिर कांग्रेस का सांसद चुना गया। इसके बाद इस सीट से कांग्रेस गायब ही हो गई।
वहीं, जनसंघ को मिलाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का भी पांच बार सांसद (1971, 1991, 1998, 2014, 2019) चुना गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का दो बार सांसद चुना गया है। साल 1967 में जागेश्वर यादव और 1989 में रामसजीवन सिंह पटेल को भाकपा से सांसद बनने का मौका मिला था। रामसजीवन सिंह 1996 और 1999 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से भी सांसद रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) को भी तीन बार (2004,2009,2024) मौका मिला है। वर्तमान में इन्हीं पार्टी की कृष्णा पटेल सांसद हैं।
आठ बार बांदा और आठ बार चित्रकूट के निवासी रहे सांसद, दो बार बाहरी
दो जिलों को मिलाकर एक संसदीय सीट होने से अक्सर क्षेत्रवाद का आरोप लगता रहा है। कहा जाता है कि जिस जिले का सांसद होता है, उस जिले में ज्यादा काम करवाता है। बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट पर आजादी के बाद से साल 2024 तक 18 सांसद चुने गए। इनमें से आठ सांसद बांदा जिले के मूल निवासी और आठ सांसद चित्रकूट जिले के मूल निवासी रहे हैं। दो सांसद दूसरे जिले के रहने वाले चुने गए थे।
साल 1952 में पहली बार बांदा संसदीय सीट से चुने गए कांग्रेस के सांसद शिवदयाल उपाध्याय फतेहपुर जिले के रहने वाले थे। साल 1957 में कांग्रेस से सांसद चुने गए राजा दिनेश सिंह प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले थे। इसके बाद 1962, 1967, 1971, 1977, 1980 और 1984 में लगातार बांदा के मूल निवासी इस सीट से सांसद चुने गए। साल 1991 और 1996 में चित्रकूट जिले के मूल निवासी सांसद चुने गए। साल 1988 में कौशंबी में रहने वाले बांदा के मूल निवासी रमेश चंद्र द्विवेदी भाजपा से सांसद चुने गए। इसके बाद लगातार पांच चुनावों 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 में चित्रकूट जिले के मूल निवासी सांसद चुने गए। साल 2024 में फिर बांदा की मूल निवासी कृष्णा पटेल सांसद चुनी गई हैं।
62 साल बाद दूसरी महिला सांसद
आजादी के बाद से अब तक बांदा सीट से दो बार महिला सांसद चुनी गईं। पहली बार तीसरी लोकसभा, साल 1962 में कांग्रेस से सावित्री निगम बांदा संसदीय सीट से सांसद बनीं थीं। इसके बाद 18वीं लोकसभा में 62 साल बाद 2024 में सपा से कृष्णा पटेल सांसद चुनी गईं हैं। महिला सांसद चुने जाने का काफी लंबा अंतराल रहा है।
लोकसभा सीट चित्रकूट-बांदा में मतदाता
कुल मतदाता -13,26,580
पुरुष - 7,21,731
महिलाएं- 6,04,808
थर्ड जेंडर- 41