बांदा। मंडल कारागार से शुक्रवार को न्यायालय में पेशी पर लाया गया बंदी लघु शंका के बहाने चकमा देकर भाग निकला। सुरक्षा में लगा पुलिसकर्मी ढाई घंटे तक मामले को दबाए रहा।
बाद में उच्चाधिकारियों को जानकारी होने पर पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बंदी की गिरफ्तारी के लिए छह टीमों का गठन किया है। पुलिस बंदी की तलाश में सीसीटीवी खंगालने के साथ ही लगातार दबिश दे रही है।
चिल्ला थाना पुलिस ने थाना पैलानी क्षेत्र के खप्टिहा कलां निवासी संजय सिंह (32) को 65 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया था। उसके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजा गया था। शुक्रवार को मंडलीय कारागार से उसे न्यायालय में पेशी के लिए लाया गया था। पेशी के इंतजार में जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित हवालात में उसे रखा गया था।
इसी बीच दोपहर ढाई बजे के करीब उसने लघु शंका जाने की बात कही। इस पर यहां तैनात हेड कांस्टेबल वीर सिंह के साथ उसे लघु शंका के लिए भेज दिया गया।
बस इसी बीच किसी तरह संजय चकमा देकर भाग निकला। करीब ढाई घंटे तक हेड कांस्टेबल वीर सिंह खुद ही उसकी तलाश करता रहा। जब संजय का कहीं सुराग नहीं लगा तो उसने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी। बंदी के भागने की सूचना से हड़कंप मच गया।
एसपी पलाश बंसल ने भागे हुए बंदी की गिरफ्तारी के लिए आधा दर्जन से अधिक टीमों का गठन किया गया है। साथ ही सभी सीमाओं पर भी चेकिंग की जा रही है। पुलिस जिला एवं सत्र न्यायालय के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाल रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही बंदी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वर्जन
कारागार से पेशी पर लाया गया बंदी संजय सिंह लघु शंका के बहाने पुलिसकर्मी को चकमा देकर भाग निकला है। सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी की लापरवाही के चलते काफी देर से सूचना मिली। इससे बंदी को भागने का समय मिल गया। टीमें उसकी तलाश कर रही हैं, जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
-पलाश बंसल, एसपी बांदा
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पुलिसकर्मी की दोहरी लापरवाही का फायदा उठाया
बांदा। जिला एवं सत्र न्यायालय से भागे बंदी ने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी की दोहरी लापरवाही का फायदा उठाया। पहले तो सुरक्षा में चूक के चलते वह भाग निकला, वहीं ढाई घंटे तक इसकी सूचना दबाए जाने के चलते उसे दूर निकलने का मौका मिल गया। सुरक्षा का ध्यान रखा जाता और सूचना देने में देरी न होती तो बंदी पुलिस की गिरफ्त में होता।
जिन बंदियों की न्यायालय में पेशी होती है उन्हें कड़ी सुरक्षा में कारागार से लाया जाता है। उन्हें जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित हवालात में रखा जाता है। यहां से सुनवाई की बारी आने पर सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी लेकर जाता है। नियमानुसार बंदी को बाहर ले जाने पर उसके हाथ में हथकड़ी लगाई जाती है, जिसकी रस्सी सुरक्षाकर्मी के हाथ रहती है। इसका सीधा कारण यही है कि बंदी अगर भागने की कोशिश करे तो सफल न हो सके। लघु शंका के लिए ले जाने पर यही नियम लागू होता है।
शुक्रवार को जब बंदी संजय सिंह को हेड कांस्टेबल वीर सिंह हवालात से निकालकर लघु शंका के लिए ले गया तो यहीं से सुरक्षा में चूक शुरू हो गई। हथकड़ी नहीं लगाने से उसे पता ही नहीं चला कि कब बंदी उसे चकमा देकर भाग निकला। दूसरी तरफ आखिर कैसे पुलिसकर्मी की निगाह बंदी से हट गई यह भी बड़ा सवाल है।
अगर बात यहीं तक रहती तो भी शायद बंदी भागने में नाकाम हो जाता है। सुरक्षा में चूक के बाद हेड कांस्टेबल वीर सिंह ने सूचना भी रोक ली। किसी को बताया ही नहीं कि बंदी भाग गया है। हद तो तब हो गई जब ढाई घंटे तक किसी को इसकी जानकारी ही नहीं हुई। शाम पांच बजे के करीब जब हेड कांस्टेबल ने इंस्पेक्टर व अन्य अधिकारियों को सूचना तो बंदी के भागने की बात सामने आई। ढाई घंटा बंदी के लिए भागने के लिए पर्याप्त समय है।
इतना समय जिले की ही नहीं बल्कि मंडल की सीमा पार करने के लिए भी पर्याप्त है। पूरे मामले में अब तक बंदी संजय सिंह को लघु शंका के लिए ले जाने वाला हेड कांस्टेबल वीर सिंह की लापरवाही सामने आ रही है। ऐसे में वीर सिंह पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी है। हालांकि पुलिस अधिकारी पहले बंदी की गिरफ्तारी पर फोकस कर रहे हैं। इसके बाद ही कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
मध्यप्रदेश भागने की प्रबल आशंका
उत्तर प्रदेश की सीमा चित्रकूट पर समाप्त हो जाती है। बंदी को भागने के लिए करीब ढाई घंटे का समय मिला। ऐसे में मध्यप्रदेश भागने की भी प्रबल आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो उसकी गिरफ्तारी आसान नहीं होगी। हालांकि पुलिस बंदी के परिजन, रिश्तेदार समेत अन्य सभी के संपर्क में है। साथ ही बंदी की गिरफ्तारी के लिए सर्विलांस की भी मदद ली जा रही है।
पेशी के दौरान लापरवाही के नजारे हैं आम
जिला एवं सत्र न्यायालय में पेशी पर लाए जाने वाले बंदियों की सुरक्षा में लापरवाही के नजारे हर दिन देखने को मिलते हैं। कभी बंदी सुरक्षाकर्मी से दूर चलता नजर आता है तो कभी हथकड़ी गायब होती है। अगर हथकड़ी लगी भी होती है तो उसकी रस्सी बंदी के हाथ में ही होती है।