चित्रकूट। अपर सत्र न्यायाधीश राम मणि पाठक की अदालत ने बिजली चोरी में उपभोक्ता जय नारायण को न्यायालय उठने तक की सजा दी। साथ ही उस पर तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह मामला 29 अक्टूबर 2013 का है। तत्कालीन अवर अभियंता राजेश कुमार की अगुवाई में टीम ने कर्वी कोतवाली क्षेत्र के लोढ़वारा निवासी उपभोक्ता जय नारायण के यहां बिजली कनेक्शन की जांच की तो जांच में पाया कि उस पर 1,47,492 रुपये बकाया था। बकाया बिल के बावजूद चोरी से बिजली जलाई जा रही थी। जिस पर उपभोक्ता के खिलाफ भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 138(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचक ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किए। अदालत ने 20 फरवरी 2021 को आरोप तय किए थे, जिसे उसने अस्वीकार कर दिया था और विचारण की मांग की थी। हालांकि, बाद में उसने 29 अप्रैल 2026 को अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उसने अदालत से कम सजा देने की अपील की थी, यह कहते हुए कि वह गरीब है और दिल्ली में मजदूरी करता है। बिजली विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बकाया राजस्व जमा कर दिया गया है, लेकिन शमन शुल्क अभी भी बाकी है। अदालत ने उसके जुर्म कबूलनामे और राजस्व जमा करने के आधार पर उसे दोषी ठहराया। अर्थदंड न चुकाने पर उसे दो दिन का कारावास भुगतना होगा।
बिजली चोरी में मोहम्मद हबीब दोषमुक्त, जमा किया शमन शुल्क
चित्रकूट। अपर सत्र न्यायाधीश राम मणि पाठक की अदालत ने बिजली चोरी में मोहम्मद हबीब को दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला आरोपी द्वारा विद्युत विभाग को शमन शुल्क और बकाया बिल जमा करने के बाद सुनाया गया।
रैपुरा थाना इलाके के मुस्लिमपुर बसिला निवासी मोहम्मद हबीब के यहां बीते 3 सितंबर 2022 को तत्कालीन अवर अभियंता दारा सिंह द्वारा कनेक्शन की जांच की गई थी। जांच में उपभोक्ता पर मीटर बाईपास कर बिजली चोरी का आरोप था। इस मामले में अवर अभियंता दारा सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने 30 दिसंबर 2025 को दो हजार रुपये शमन शुल्क और 7896 रुपये बकाया विद्युत बिल जमा किया। विद्युत विभाग ने भी इसकी पुष्टि की। अदालत ने भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 152 के तहत शमन स्वीकार कर हबीब को दोषमुक्त किया। उसके जमानतनामे और व्यक्तिगत बंध पत्र निरस्त कर दिए गए। (संवाद)
बिजली चोरी के आरोपी रामभरोसे सिंह को मिली जमानत
चित्रकूट। अपर सत्र न्यायाधीश (ईसी एक्ट) न्यायालय ने बिजली चोरी के आरोप में न्यायिक हिरासत में चल रहे रामभरोसे सिंह को जमानत दे दी।
भरतकूप थाना क्षेत्र के गोबरिया बुजुर्ग निवासी रामभरोसे सिंह के यहां बीते तीन सितंबर 2022 को प्रवर्तन दल ने कनेक्शन की जांच की थी। जांच में एक किलोवाट बिजली चोरी का आरोप लगा था। इस मामले में रामभरोसे सिंह पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में आरोपी रामभरोसे सिंह के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी डाली थी। न्यायालय ने मामले के निस्तारण में लगने वाले समय और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए 25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मंजूर की। (संवाद)
न्यायालय ने अनुपस्थिति के कारण प्रेमेश कुमार का परिवाद किया खारिज
चित्रकूट। सिविल जज सीनियर डिवीजन ने प्रेमेश कुमार उर्फ प्रमोद कुमार द्वारा वर्ष 2025 में दायर एक परिवाद को खारिज कर दिया। यह परिवाद रावेंद्र नामदेव के विरुद्ध धारा 138 एन.आई. एक्ट के तहत दायर किया गया था।
न्यायालय ने पाया कि परिवादी प्रेमेश कुमार उर्फ प्रमोद कुमार लगातार कई तारीखों से सुनवाई में अनुपस्थित रहा। उसकी ओर से कोई स्थगन प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया। सिविल जज सीनियर डिवीजन डॉ. सचिन कुमार दीक्षित ने अपने आदेश में कहा कि परिवादी का परिवाद धारा 203 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत खारिज किए जाने योग्य है। ऐसे में न्यायालय में दायर परिवाद को निरस्त कर दिया। पत्रावली को नियमानुसार दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया गया। (संवाद)
अजय को 26 हजार का अर्थदंड, जुर्म कबूला
चित्रकूट। न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद भारती ने अजय मिश्रा पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत 26 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। उसने स्वेच्छा से अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था। यह मामला रैपुरा थाना क्षेत्र से संबंधित था।
यातायात पुलिस और सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने वाहन संख्या यूपी96जे4831 का चालान किया था। इस मामले में अजय मिश्रा पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194(1) के उल्लंघन का आरोप था। उन्होंने इस धारा के संबंध में जुर्म स्वीकार करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। सुनवाई में न्यायालय ने जुर्म स्वीकारोक्ति के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया। यदि अजय मिश्रा अर्थदंड का भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें 10 दिन का कारावास भुगतना होगा। (संवाद)