पटना-पुणे एक्सप्रेस में सफर कर रहे मरीज को सूचना के बाद भी चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। इससे उसकी रास्ते में मौत हो गई। मृतक के बेटे ने बताया कि मानिकपुर स्टेशन पर ट्रेन करीब पंद्रह मिनट खड़ी रही लेकिन डाक्टर नहीं आए। जिसकारण पिता की हालत ज्यादा बिगड़ गई और सतना पहुंचने पर पिता की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर जिले के कुडनी निवासी पशुपति भगत (55) रविवार को अपने पुत्र संतोष के साथ दमा की बीमारी का इलाज कराने पुणे जा रहे थे। पटना-पुणे एक्सप्रेस के एस-2 कोच में सफर करते समय जैसे ही ट्रेन डभौरा स्टेशन के पास पहुंची, तभी पशुपति के तेज दर्द होने पर टीटीई से अगले स्टेशन पर डाक्टर बुलाने की मांग की। संतोष ने बताया कि टीटीई ने कहा कि अगला स्टेशन मानिकपुर है, जहां के स्टेशन प्रबंधक को सूचना दे दी गई है।
वैसे ट्रेन तो जंक्शन पर रुकती नहीं है लेकिन टीटीई ने गार्ड व चालक को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई। संतोष ने बताया, ट्रेन मानिकपुर स्टेशन पर सुबह करीब साढ़े छह पहुंची और करीब पंद्रह मिनट तक रुकी रही, लेकिन कोई डाक्टर नहीं आया। इससे ट्रेन आगे बढ़ गई और एमपी के सतना पहुंचने पर उनके पिता की मौत हो गई। इस मामले में सतना स्टेशन प्रबंधक कल्लूराम मीणा और जीआरपी इंचार्ज एसआर बागरी ने बताया कि मरीज की मौत ट्रेन में ही हो गई थी।
सूचना पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, इस मामले में मानिकपुर स्टेशन प्रबंधक जवाहरलाल और जीआरपी प्रभारी जेपी सिंह ने बताया कि ऐसी कोई सूचना नहीं मिली थी। ट्रेन रुकी जरूर थी, लेकिन मरीज होने की सूचना नहीं दी गई।
उत्तर मध्य रेलवे के चीफ कामर्शियल इंस्पेक्टर केके राय ने बताया कि यदि सूचना मिलती, तो इलाज के लिए डाक्टर उपलब्ध कराए जाते हैं। इधर, मृतक के पुत्र संतोष ने बताया कि सूचना तो दी गई थी, ट्रेन भी खड़ी रही लेकिन कोई टीम नहीं आई। जिससे उसके पिता की हालत ज्यादा गंभीर हो गई।