उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम आसरे विश्वकर्मा ने योजनाओं की समीक्षा की तो आधे अधिकारी सवालों का जवाब नहीं दे सके। कुछ तो पिछले वित्तीय वर्ष में छात्रवृत्ति, पेंशन, आवास आवंटन, पट्टा आवंटन का आंकड़ा तक नहीं बता सके। जिससे नाराज अध्यक्ष ने 15 दिन के अंदर सभी सूचनाएं डीएम के माध्यम से विभाग को देने का निर्देश दिया। बैठक से गैरहाजिर पांच अधिकारियों के वेतन काटने का आदेश दिया है।
कलेक्ट्रेट सभागार में रविवार को पिछड़ी जाति आरक्षण के सापेक्ष भरे हुए विभिन्न पदों, पिछड़े वर्ग के लिए सामाजिक सुरक्षा की चलाई जा रही योजनाओं की आयोग के अध्यक्ष ने समीक्षा की। जिसमें पिछड़ा वर्ग कल्याण, समाज कल्याण, डीआईओएस, मत्स्य पालन व कृषि मंडी समिति के अधिकारी पूरी जानकारी नहीं दे पाए। उन्होेंने कहा कुछ विभागों की स्थिति बेहद खराब है। कांशीराम आवास के संबंध में कहा अवैध कब्जे खाली कराए जाए। शादी अनुदान योजना में पात्रों को चुनाव की आचार संहिता से पहले लाभान्वित किया जाए।
उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी सुनील चंद्र व कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव छेदीलाल पटेल से पिछड़े वर्ग को आवंटित दुकानों की सूची उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही अल्प संख्यक छात्रवृत्ति, शादी अनुदान, डा. राम मनोहर लोहिया आवास, इंदिरा आवास, समाजवादी, विधवा, विकलांग, वृद्धावस्थ पेंशन, कांशीराम आवास, मत्स्य पालन आदि योजनाओं की जानकारी मांगी। बैठक में एसपी केके चौधरी, सीडीओ ए दिनेश कुमार, अपर जिलाधिकारी हवलदार सिंह, सीएमओ डा. अनीता सिंह, बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा, उप निदेशक कृषि जगदीश नारायण, डीआईओएस मो. रफीक आदि अधिकारी मौजूद रहे।
समीक्षा बैठक में जिला युवा कल्याण व प्रादेशिक विकास दल अधिकारी, आबकारी अधिकारी, होमगार्ड कमांडेंट, प्रभागीय वनाधिकारी व परियोजना अधिकारी डूडा समेत अन्य कई अधिकारी बैठक में अनुपस्थित रहे। इस पर आयोग के अध्यक्ष ने डीएम मोनिका रानी से उनका एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिया है।