चित्रकूट। जिले के बहुचर्चित कोषागार (ट्रेजरी) घोटाले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। फिलहाल जांच केवल उन्हीं तथ्यों पर की जा रही है, जिन्हें एजी कार्यालय की ऑडिट टीम ने चिन्हित किया था। लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही मौत का खेल आरंभ हो गया है। अब यह मामला लोगों के बीच एनएचएम घोटाले से जोड़ा जाने लगा है, जिसमें भी जांच शुरू होने से पूर्व कई संबंधित व्यक्तियों की असमयिक मौतें हो चुकी थीं।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस मुख्य आरोपी सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव के घर पूछताछ के लिए पहुंची थी, लेकिन वह घर पर नहीं मिले। इसके बाद पुलिस उनकी पत्नी को पूछताछ के लिए कोतवाली ले आई। पत्नी को कोतवाली ले जाने के बाद संदीप स्वयं कोतवाली पहुंचे, जहां पूछताछ शुरू होने से पहले ही पत्नी को घर भेज दिया गया।
बताया गया कि संदीप की आमद किसी भी सरकारी अभिलेख में दर्ज नहीं की गई। थोड़ी देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। यह पूरा घटनाक्रम अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
घोटाले में शामिल ट्रेजरी के तीन अन्य कर्मचारियों की स्थिति भी उतनी ही संदिग्ध बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, ये तीनों पिछले कई दिनों से कोतवाली में पूछताछ के लिए रखे गए हैं, लेकिन किसी की गिरफ्तारी दर्ज नहीं की गई। परिवार के लोग कई दिनों से उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। संदीप की मौत के बाद उनके परिजन भयभीत और सशंकित हैं।
उनका कहना है कि पुलिस किसी भी विधिक प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही, जिससे यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं उनके परिजनों के साथ भी कुछ अनहोनी न हो जाए।
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घोटालेबाज कर्मचारी और पेंशनरों की एकमात्र कड़ी
सूत्रों का कहना है कि ट्रेजरी से पेंशनरों के खातों में धनराशि ट्रांसफर की जाती थी, जिसे साठ-चालीस के अनुपात में निस्तारित किया जाता था।
इस व्यवस्था में 60 प्रतिशत रकम वापस ट्रेजरी कर्मचारियों और अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी, जबकि 40 प्रतिशत पेंशनरों को मिलता था।
बताया गया कि इस पूरे नेटवर्क की मुख्य कड़ी सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव थे। वह ही बता सकते थे कि ट्रेजरी में आने वाला पैसा किसके- किसके पास जाता था।
उनकी मृत्यु के बाद यह सारा रहस्य अब फाइलों और गोपनीय दस्तावेज़ों में दफन हो गया है।
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जांच से पहले ही उठे सवाल, मौत ने बढ़ाई रहस्य की दीवार
संदीप श्रीवास्तव की संदिग्ध मौत और अन्य कर्मचारियों की गायब स्थिति ने कोषागार घोटाले को एक नए मोड़ पर ला दिया है। जांच की धीमी रफ्तार, गोपनीयता और प्रशासनिक चुप्पी यह संकेत दे रही है कि मामला केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता की गंभीर परीक्षा बन गया है। स्थानीय स्तर पर लोग अब इसे साजिश से जुड़ी मौत मान रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि असली चेहरों का खुलासा हो सके।
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पूर्व मुख्यमंत्री के ट्वीट से सियासी बवाल
मुख्य आरोपी की मौत या हत्या का कमेंट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है।
इसको लेकर अब प्रदेश में भी सियासी बहस छिड़ गई है।