पर्यटन की संभावनाएं एवं समस्याओं के विषय में दो दिवसीय संगोष्ठी गोस्वामी तुलसीदास महाविद्यालय में शुरू हुई। जिसका शुभारंभ विकलांग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश चंद्र दुबे व महाविद्यालय के प्राचार्य डा. तिलकधारी सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर किया। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने से पूरा क्षेत्र विकसित होता है। बुंदेलखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
संगोष्ठी के संयोजक डा. राजेश कुमार पाल ने कहा कि पर्यटन मानव जीवन परंपरा का आरंभ से ही एक हिस्सा रहा है। नये स्थानों के प्रति मनुष्य की जिज्ञासा, तीर्थाटन, व्यापार, विनिमय आदि कारणों से पर्यटन की खोज का विस्तार हुआ। भारत में तीर्थाटन से देशाटन सोच का विकास हुआ। आधुनिक परिवेश में बात करें तो पर्यटन ने अब तमाम अवसर दिए हैं।
पर्यटन विश्व के तमाम देशों में बड़े उद्योगों को रोजगार देने का काम कर रहा है। इसके साथ ही देश को विदेशी मुद्रा का अर्जन भी होता है। भारत हमेशा से ही पर्यटनों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। डा. निर्मला शर्मा ने कहा कि चित्रकूट क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं हैं। अधिवक्ता आलोक द्विवेदी ने कहा कि चित्रकूट में मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमा के कारण समस्याओं का सामना पर्यटनों को करना पड़ता है।
जिसके लिये यह क्षेत्र फ्री जोन होना चाहिए। डा. बालकृष्ण पांडेय ने गोस्वामी तुलसीदास कृत रामायण कवितावली व गीतावली में वर्णित चित्रकूट के सौंदर्य पर चर्चा किया।