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अज्ञानता से प्रेत बन गया था धुंधकारी : उमाकांत

Thu, 19 Mar 2015 10:24 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
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चित्रगुप्त मंदिर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन पं. उमाकांत शास्त्री ने श्रोताओं को धुंधकारी राक्षस की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि अज्ञानता की वजह से ही वह प्रेत योनि को प्राप्त हो गया था। भागवत कथा सुनकर वह इससे मुक्त हो गया।
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उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने और मनन करने से, उसके आदर्शों को जीवन में उतारने से मानव का कल्याण होता है। जहां प्रभु की कृपा होती है, वह घर खुशहाल रहता है।
उधर, भरत मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा वक्ता बनवारी बापू ने कहा कि सुदामा के गरीब होने के बाद भी भगवान को उनसे अगाध प्रेम था।
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प्रेम जाति और ऊंच नीच नहीं देखता। समापन के दौरान हवन पूजन हुआ। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास सहित कान्हा गोशाला समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया। दिव्यजीवन दास ने अलवर से आए कथावक्ता और अन्य लोगों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर होली भी खेली गई।
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