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बदलते मौसम के बीच लगाई आस्था की डुबकी

Thu, 01 Sep 2016 09:56 PM IST
चित्रकूट
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भदई अमावस्या पर मंदाकिनी में डुबकी लगाने के लिए मौजूद श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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भदई अमावस्या में धर्मनगरी के मौसम का मिजाज सुबह से शाम तक बदलता रहा। सुबह श्रद्धालुओं ने रिमझिम बारिश के बीच मंदाकिनी में डुबकी लगाई फिर दोपहर को उमस भरी गर्मी के बीच कामदगिरी की परिक्रमा लगाई। कई लोग रोक के बावजूद ट्रेन व बस की छतों पर भी बैठकर धर्मनगरी पहुंचे।
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धर्मनगरी में अमावस्या पर भगवान कामतानाथ के दर्शन करने को इस बार दो दिन पहले से मेला लगने लगा था। श्रद्धालु भजन कीर्तन करते हुए टोलियां बनाकर तीर्थ स्थल पहुंचते रहे। गुरुवार को सूर्योदय के पूर्व ही लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाई।

फिर मत्गयेंद्रनाथ स्वामी का जलाभिषेक कर कामतानाथ प्रमुख द्वार पहुंचे। खुशहाली की मनौती मानने के बाद माथा टेका और रिमझिम बारिश मेें परिक्रमा लगाई। तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थल हनुमान धारा, गुप्त गोदावरी, अनुसुइया आश्रम, जानकी कुंड आदि के दर्शन भी किए।
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मेला क्षेत्र में शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीएम मोनिका रानी व एसपी केके चौधरी समेत सभी जोनल मजिस्ट्रेट लगातार मेला क्षेत्र का निरीक्षण करते देखे गए।
तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए कई स्पेशल ट्रेनें और अतिरिक्त बसें चलाई गई हैं।

फिर भी दोपहर को स्टेशन व बस स्टैंड पर जीआरपी और सिविल पुलिस डंडे फटकार कर ट्रेन व बस की छतों पर बैठे श्रद्धालुओं को नीचे उतारती रही। इस बार पड़ा। एआरटीओ के बेडीपुलिया और शिवरामपुर मोड़ के पास दिनभर चेकिंग के कारण टेंपो में ओवरलोड कम रहा।

धर्मनगरी उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा में पड़ने के कारण मध्य प्रदेश का प्रशासन भी मेला क्षेत्र की व्यवस्था करने में लगा रहा। प्रमुख अधिकारी खुद मोर्चा संभाले रहे। गल्ला व्यापार समिति ने अमावस्या पर आने वाले श्रद्धालुाओं के लिए भण्डरा का आयोजन गुरूवार को किया। स्टेशन रोड में भोजन करने को बड़ी संख्या में श्रंद्धालु पहुंचे।

भण्डरा आयोजित करने में गल्ला व्यापार समिति के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, मंत्री गुलाब चन्द्र  गुप्ता, अतुल अग्रवाल, ओम प्रकाश साहू, रामनिहोरे केसरवानी, सुरेश भारद्वाज रज्जन गुप्ता, लक्ष्मी गुप्ता, सोनू गुप्ता व मनोज केसरवानीआदि रहे।


 उम्मीद के मुताबिक इस बार भदई अमावस्या में श्रद्धालुओं की भीड़ कुछ कम रही। भरत मंदिर के मंहत दिव्य जीवनदास ने बताया कि यूपी के कई क्षेत्रों में बाढ़, बारिश और दो साल पहले इसी अमावस्या पर हुए दर्दनाक हादसे के कारण श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम देखी गई।
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