बम के साथ पकड़े गए आरोपी महेश कुमार से पूछताछ में सामने आया है कि विरोधी गुट से बदला लेने के लिए इन बमों को बनाया गया था। आरोपी के गुट की मुख्यालय के ही एक अन्य गुट से वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। बीते दिनों हुए विवाद के बाद असलहे भी लहराए गए थे। जिसके बाद यह साफ हो गया है कि ये बम किसी बड़ी साजिश का हिस्सा नहीं थे, पुलिस का दावा है कि एक बम से दो लोगाें की जान को खतरा हो सकता था। बम मुख्यालय के इलाहाबाद रोड़ स्थित एक घर में बनाए गए। पुलिस ने इस स्थान पर छापेमारी की लेकिन घर में कोई नहीं मिला। पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों की शिनाख्त कर ली है, जिनकी तलाश की जा रही है।
पूछताछ के बाद आखिरकार बम के साथ पकड़े गए महेश कुमार ने पुलिस को बताया कि मुख्यालय के गंाधीगंज इलाहाबाद रोड़ निवासी दीपू पांडेय, रामचंद्र रैकवार और अरविंद के गुट में वह शामिल है। जबकि दूसरा गुट मुख्यालय के ही दो युवकों का है। दोनों गुट में कई बार मारपीट हो चुकी है। 26 जनवरी को हवाई फायरिंग भी हुई थी। पांच दिन पूर्व विरोधी गुट ने उनके गुट के सदस्यों को पीटा था। जिनसे बदला लेने के लिए रामचंद्र व दीपू ने मिलकर देशी बम घर में बनवाए थे। बम लेकर इसीलिए चलते थे कि कहीं मारपीट हुई तो अबकी इसे फोड़ देंगे।
जीआरपी थानाध्यक्ष हरिविलास ने बताया कि इसी वर्चस्व की जंग के कारण दोनों गुट के युवकों के संपर्क ट्रेन में चलने वाले जेबकतरों से भी हुए। इस कारण यह लोग स्टेशन व ट्रेन में वसूली करते हैं। रामचंद्र रैकवार तो हत्या के आरोप में जेल तक जा चुका है। दीपू जुआ खिलवाता है। पूरी जानकारी के बाद जीआरपी टीम और कोतवाली टीम ने दोनों स्थानों पर छापेमारी की लेकिन मौके पर कोई नहीं मिला। सभी फरार हैं। जल्द ही इन सबको पकड़ा जाएगा।
शहर के बीचोंबीच बन रहे बम
बम निष्क्रिय होने के बाद जिला प्रशासन भले ही राहत की सांस ले रहा हो लेकिन यह चिंता का विषय है कि मुख्यालय में आपसी गुटबाजी में युवक बम तैयार कर रहे हैं, वह भी शहर के बीचोंबीच। जांच के लिए मुख्यालय आए मानिकपुर जीआरपी थानाध्यक्ष जेपी सिंह ने कहा कि यह तो वाकई चिंता का विषय है कि देशी बम शहर में बन रहे हैं। इनका प्रयोग खतरनाक है। जल्द ही ऐसे लोेगों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।