मानिकपुर/चित्रकूट। जनपद में इन दिनों तेंदू पत्ता की खुलेआम तस्करी हो रही है। मानिकपुर जंक्शन से ट्रेनों और कारों के माध्यम से तेंदू पत्ता प्रयागराज और सतना भेजा जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर दिन रात जीआरपी और आरपीएफ के जवान तैनात रहते हैं। मजदूरों का कहना है कि वन विभाग नकद पैसे नहीं देता है इस वजह से होती है दिक्कत।
वन निगम हर वर्ष तेंदू पत्ता का तुड़ान कराकर बीड़ी व्यवसायियों को बेचता रहा है। इधर नियमों में बदलाव होने से संग्रहणकर्ता मजदूर वन निगम के फड़ो पर हरा पत्ता देने के बजाए तस्करों को बेच दे रहे हैं। इस कारण तेंदू पत्ते को क्रय करने के लिए वन विभाग की ओर से लगाए गए फड़ खाली पड़े रहते हैं। वहीं, वन निगम ने रिजर्व फॉरेस्ट को चोरी रोकने के सख्त निर्देश दिए हैं।
इस मामले में शंकर, संतोष, कैलाश, रामकली, लवलेश, विमला, राजरानी ने बताया कि पहले वन निगम तेंदू पत्ते का नकद भुगतान करता था। इससे हम लोगों को दिक्कत नहीं होती थी। खर्च के लिए रुपये मिल जाते थे। अब वन विभाग पैसे बैंक खाते में भेजता है। पैसे निकालने के लिए बैंक का चक्कर काटना पड़ता है। मजबूरी में खुद ही महानगरों में पत्ता बेच रहे हैं। नकद पैसा मिल जाता है तो बैंक जाने के झंझट से बच जाते हैं।
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तस्करी की सूचना पर अभियान चलाया जाता है। दस लोगों को पकड़ा भी गया, लेकिन महिला होने की वजह से चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। उनसे पत्ता रखवा लिया गया। जीआरपी और आरपीएफ कर्मी सहयोग नहीं करते हैं। वन क्षेत्र से तो रोक लगाई जाती है लेकिन स्टेशन व बाजार पहुंचने पर संबंधित क्षेत्र की पुलिस मदद नहीं करती है।
- गौरव पांडेय, वन निगम के दरोगा