महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में
पाठ्यक्रम विकास एवं शोध परियोजना नियोजन व निर्माण विषय पर कार्यक्रम
आयोजित किया गया।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली की संयुक्त
सचिव डॉ. उर्मिला देवी मुख्य अतिथि थीं। अध्यक्षता ग्रामोदय विश्वविद्यालय
कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने की।
मुख्य अतिथि डॉ. उर्मिला ने कहा
कि शिक्षकों को संकीर्णताओं से अलग हटकर शिक्षण, शोध और प्रसार के नवीन
आयामों से जुड़ना चाहिए। यूजीसी शोध और परियोजनाओं के माध्यम से बिना किसी
बैरियर के शिक्षकों और शोधार्थियों का सहयोग करती है।
उन्होंने
यूजीसी द्वारा संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कहा कि ब्रेन स्टार्मिंग के ऐसे सेशन परास्नातक एवं शोधार्थियों के लिए भी
होने चाहिए।
कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि शिक्षक के पास
उपलब्ध ज्ञान को प्रसारित करने के लिए कोई सीमा आड़े नहीं आती है। वह अपना
ज्ञान पूरी दुनिया में फैलाने में सक्षम होता है।
विद्यार्थी और
शोधार्थी उसके प्रमुख आधार होते हैं। प्रो. गौतम ने शिक्षकों का आह्वान
किया कि वे यूजीसी की गाइडलाइन का अध्ययन कर अधिक से अधिक परियोजनाएं
प्रस्तुत कर देश के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में भागीदार बनें।
इससे
पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. कपिल देव
मिश्र, कार्यक्त्रस्म संयोजक डॉ. कुसुम सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत
किया। कुलपति ने स्मृति चिह्न के रूप में चित्रकूट के आराध्य देव श्री
कामद्नाथ जी का तैल चित्र भेंट किया।
स्वागत भाषण कला संकाय के
अधिष्ठाता प्रो. कपिल देव मिश्र ने दिया। डॉ. कुसुम सिंह ने कार्यक्रम के
उद्देश्य एवं औचित्य पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर संकायों के अधिष्ठाता,
विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक मौजूद रहे।