रिसर्च करने ताइवान गए आईआईटीएन का शव करीब दो माह बाद गांव पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि शव भारत लाने में विदेश मंत्रालय से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। कोतवाली क्षेत्र के कुंजनपुरवा कसहाई गांव निवासी किसान रामगोपाल पाल के बेटे राधेश्याम (27) आईआईटी रूड़की से केमेस्ट्री की पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान एक स्कालरशिप प्रोग्राम के तहत उनका पीएचडी के लिए ताइवान में सलेक्शन हो गया। वह फरवरी 2013 में ताइवान के हिंचू स्थित नेशनल ट्सिंग हुआ यूनिवर्सिटी (एनटीएचयू) चले गए।
राधेश्याम के बडे़ भाई प्रभुदयाल ने बताया कि 16 दिसंबर 2016 को उसकी हास्टल के कमरे में संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। यूनिवर्सिटी की ओर से 19 दिसंबर को उन्हें सूचना दी गई। 22 दिसंबर को पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद परिजनों ने उसका शव भारत भेजने की मांग की। आरोप है कि शव न आने पर वे विदेश मंत्रालय में चक्कर काटते रहे।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बीमार होने की वजह से केंद्रीय मंत्री वीके सिंह से मुलाकात कर शव भारत लाने में मदद करने की मांग की। इसके बाद भी शव नहीं आया तो वे फिर ताइवान के हिंचू स्थित यूनीवर्सिटी से बात की। किसी तरह दो माह बाद 22 फरवरी को एयरप्लेन से शव दिल्ली आया। मृतक के भाई ने आरोप लगाया कि दिल्ली में फिर विदेश मंत्रालय से प्रयास कर शव दिल्ली से गांव तक पहुंचाने की सिफारिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिर वह खुद एंबुलेंस से शव लेकर 23 फरवरी को गांव पहुंचे।
24 फरवरी को जिलाधिकारी मोनिका रानी व पुलिस अधीक्षक डीपी सिंह को इसकी जानकारी दी गई। इस पर सीओ सिटी मौके पर पहुंचे और परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली। परिजनों ने शाम को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने सीओ से कहा कि राधेश्याम की हत्या की गई है इसकी जांच कराई जाए। जिस पर सीओ ने कहा कि उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाएगी। गांव के सूरज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार से आर्थिक मदद और घटना की जांच कराने की मांग की गई है।
कसहाई गांव के किसान के बेटे राधेश्याम का चयन 2013 में पूरे देश भर में हुए चार छात्रों के साथ हुआ था। उसे वैज्ञानिक बनने की चाह थी। शुरू से वह मेधावी था। राधेश्याम पाल ने हाईस्कूल तक की शिक्षा ज्ञानभारती इंटर कालेज, इंटरमीडिएट चित्रकूट इंटर कालेज, बीएससी इलाहाबाद विश्वविद्यालय और फिर एमएससी रूडकी आईटीआई से किया। फरवरी 2013 में उसका चयन कैंपस इंटरव्यू में उड़ीसा के विजय कुमार, दिल्ली के रचित कुमार और छत्तीसगढ़ के सुजीत कुमार के साथ ताइवान के लिे हुआ था।
अलग-अलग ब्रांच होने पर चारों अलग हास्टल में रहते थे। वृद्ध पिता रामगोपाल ने बताया कि राधेश्याम फरवरी 2015 में घर आया था। 19 जनवरी को उसे गांव आना था, लेकिन इससे पहले उसकी मौत की सूचना आई। मृतक के मामा ने बताया कि राधेश्याम की मां छितिया देवी की 2008 में ही मौत हो चुकी थी। तीन भाई व तीन बहनों में वह मझला था। बहनों व दो भाइयों की शादी हो चुकी है। पीएचडी पूरी होते ही राधेश्याम की भी शादी होनी थी।